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विश्व ज्ञान रत्न डॉ. बाबा साहेब की जयंती को ज्ञान दिवस के रूप में मनाएं : राष्ट्रवादी चिंतक राजेश खुराना

धारा लक्ष्य समाचार पत्र……..

अपील – राष्ट्रहित में 14 अप्रेल को अपने घरों में दीप जलाएं : राष्ट्रवादी चिंतक राजेश खुराना

डॉ बाबा साहेब के विचारों पर आधारित किताबें स्वयं पढ़े और बच्चों को भी बांटे तथा सभी से किताबें पढ़ने की अपील करें : राष्ट्रवादी चिंतक राजेश खुराना

विश्व ज्ञान रत्न डॉ. बाबा साहेब भीमराय अम्बेडकर जी के हम हमेशा क़र्ज़दार रहेंगे : राष्ट्रवादी चिंतक राजेश खुराना

आगरा। भारतीय सविधान के रचयिता, विश्व ज्ञान रत्न, असहायों के भाग्यविधाता, ओजस्वी लेखक, पत्रकार, सम्पादक, अर्थशास्त्री एवं अद्वितीय प्रतिभा के धनी, राजनीतिज्ञ, समाजसेवी, महान समाज सुधारक, देश के प्रथम विधि एवं न्याय मंत्री, भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माता, दलित, शोषित पीड़ित वर्ग एवं वंचितो के मसीहा, सामाजिक न्याय के प्रणेता, देश को नई दिशा देने वाले, गरीब, के ग्रेट लीडर, द नॉलेज ऑफ सिंबल, ज्ञान के प्रतिक एवं राष्ट्र नायक डॉ बाबा साहेब भीमराय रामजी अम्बेडकर जी की 134वी जन्म जयंती हर साल 14 अप्रैल को उनकी विरासत का सम्मान करने के लिए मनाई जाती है।

ज्ञान के प्रतिक एवं राष्ट्र नायक डॉ बाबा साहेब भीमराय रामजी अम्बेडकर जी के 134वे जन्म दिवस के शुभ अवसर पर सभी देशवासियों को शुभकामनायें व्यक्त करते हुए वरिष्ठ समाजसेवी एवं राष्ट्रवादी सामाजिक चिंतक राजेश खुराना ने कहा कि मैं राजेश खुराना बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर जी को उनकी 134वी जन्म जयंती के शुभ अवसर पर कोटी-कोटी नमन करते हुए उन्हें बारम्बार श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। डॉ बाबा साहेब डॉक्टर भीम राव अंबेडकर की जन्म जयंती पर, हम भारत के लोगों की तरफ से अपनी सामूहिक शक्ति का ये प्रदर्शन, ये संकल्प, भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माता, देश के प्रथम विधि एवं न्याय मंत्री, दलित, शोषित पीड़ित वर्ग एवं वंचितो के मसीहा, सामाजिक न्याय के प्रणेता, देश को नई दिशा देने वाले, गरीब, के ग्रेट लीडर, द नॉलेज ऑफ सिंबल, ज्ञान के प्रतिक एवं राष्ट्र नायक डॉ बाबा साहेब भीमराय रामजी अम्बेडकर जी को सच्ची श्रद्धांजलि है। हर साल दलितों की राजधानी आगरा में भीम जयंती के नाम से 14 अप्रैल को उनकी विरासत का सम्मान करने के लिए हर्षोल्लास से मनाई जाती है। बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर जी की 134वी जन्म जयंती के शुभ अवसर पर हमारी सभी से अपील हैं कि राष्ट्रहित में 14 अप्रेल को अपने – अपने घर और घरों की चौखट पर दीपक जलाएं और डॉ अम्बेडकर जयंती ज्ञान दिवस के रूप में मनाएं तथा डॉ बाबा साहेब के विचारों पर आधारित किताबें स्वयं पढ़े और बच्चों को भी बांटे तथा सभी से किताबें पढ़ने की अपील करें ताकि डॉ बाबा साहेब के राष्ट्रवादी विचारों का घर – घर में प्रसार हो और ये महत्वपूर्ण सन्देश देश विदेश और प्रदेश भर में बड़े स्तर जाये।

श्री खुराना ने आगे कहा कि डॉ बाबा साहेब के चिंतन और विचारों में देश सबसे ऊपर हैं। इसीलिए हमारे संविधान ने अधिक न्यायापूर्ण और लोकतान्त्रिक समाज बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण और लंबे कदम बढ़ाये हैं, लेकिन स्वतंत्रता के समय हमारे समाज में गहरी जड़े जमाई हुई आज़ादी के 76सालों के बाद भी असमानता आज़ भी मौजूद हैं। अभी इस पर एकता और राष्ट्रहित में काफ़ी कार्य किया पूरा किया जाना शेष हैं और सामाजिक असमानता को दूर करने के लिए हमारे सर्व समाज में एकता और संविधानवाद की भावना लाने की ज़रूरत हैं। यादि क़ानून के युवा छात्रों और सनातकों का मार्गदर्शन संविधान के मूल्यों से होगा, तव वे नाकाम नहीं होंगे। इस विचार का विस्तार है कि न्यायालय से संपर्क करने का अधिकार संविधान का हृदय और आत्मा है।संविधान अस्तित्व में है और संविधान काम करता है। डॉ बाबा साहेब ने हमारे देश का संविधान लिखा जिसके तहत हमारी सरकारे बर्षो वर्ष से सुचारु रूप से चल रही हैं। भारत के लोग कई संवेधानिक अधिकारों के लिए डॉ बाबा साहेब भीमराय अम्बेडकर जी के क़र्ज़दार हैं। बाबा साहेब ने भारत के औपनिवेशक शासकों के अनुग्रह के रूप में हमें संविधान नहीं प्रदान किया हैं। हमारा संविधान एक ऐसा दस्तावेज हैं जिसे देश में ही तैयार किया गया हैं, जो स्वशासन, गरिमा और स्वतन्त्रता का उत्पाद हैं। हमारा संविधान जीवन का माध्यम है, देश के विकास के लिए हम सब भारतीयों को आपस में मिलजुल कर देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास करना चाहिए। आज हम सब की जिम्मेदारी है कि हम एक दूसरे की मदद करें और देश को उन्नति एवं विकास के पथ पर आगे बढ़ाएं क्योकि डॉ बाबा साहब ने अपना पूरा जीवन गरीबों, कमजोर वर्गों के उत्‍थान के लिए न्‍योछावर कर दिया। बाबा साहब ने समाज में हर वर्ग को समानता दिलाने के लिए जीवन भर कठिन संघर्ष किया। इसलिए राष्ट्र की तरक़्क़ी हेतु हमें डॉ बाबा साहब के राष्ट्रीवादी सामाजिक चिंतन एवं हर भारतीय के लिए राष्ट्र प्रथम जैसे महत्वपूर्ण विचारों की बहुत आवश्यकता हैं, आज हमें राष्ट्रहित में देश की तरक्की, उन्नति, विकास और आपसी एकता के लिए सामाजिक असमानता को दूर कर एक साथ मिकलर सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ना चाहिए और देश की उन्नति के लिए शिक्षा हर भारतीय के जीवन का महत्वपूर्ण आधार होना चाहिए। बाबा साहेब का संघर्ष सम्पूर्ण विश्व के लोगों के लिए एक मिसाल हैं। हम कभी भी बाबा साहब के त्याग और बलिदान को भुला नहीं सकते। हम सब भी उनके विचारों और क़िताबों को पढ़कर काबिल और देश प्रेमी इंसान बन सकते हैं।

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