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राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के तिलक सभागार में हुआ, एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन

धारा लक्ष्य समाचार

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज के तिलक सभागार में समाज विज्ञान विद्या शाखा के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा “भारत की एकता एवं एकात्मकता में जगतगुरु श्री शंकराचार्य का योगदान” विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता प्रोफेसर जटाशंकर,आचार्य व विभागाध्यक्ष दर्शनशास्त्र, इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय ने अपने व्याख्यान में कहा कि सनातन धर्म की एकता को स्थापित करने के लिए चारों दिशाओं में ज्योतिष पीठ,श्रृंगेरी पीठ, द्वारिका शारदा पीठ तथा पुरी गोवर्धन पीठ नाम से चार मठ की स्थापना की उन्होंने अद्वैत वेदांत का प्रवर्तन किया। उनके दर्शन का मूल आधार एकात्मकता है। शंकराचार्य ने सनातन धर्म की एकता को अक्षुण्ण बनाए रखा एवं सांस्कृतिक एक सूत्र को बनाए रखा। उन्होंने कहा कि आदि शंकर की दिग्विजय यात्रा का उद्देश्य किसी समुदाय के विरुद्ध विद्वेष नहीं था, बल्कि भारतीय संप्रदायों धर्म में आए विकृतियों का समूह विनाश करना था। शंकराचार्य ने शक्तिहीन खंडित होते राष्ट्र को युवा अनुकूल वैज्ञानिक अध्यात्म दर्शन के आधार पर पुनर्जीवित किया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि, क्षेत्र धर्म जागरण प्रमुख पूर्वी उत्तर प्रदेश अभय ने अपने संबोधन में कहा कि शंकराचार्य को समझने के लिए सर्वप्रथम भारतीय ज्ञान परंपरा एवं वेदों को समझना होगा। उन्होंने कहा कि वह दुनिया में जो भेदभाव अलगाव दिखाई पड़ता है। वह अज्ञानता का कारण है सत्य का साक्षात्कार हो जाने या सच्चा ज्ञान प्राप्त कर लेने पर भेद बुद्धि स्वत: समाप्त हो जाती है। और सारा संसार उसी परम ब्रह्म का अभिव्यक्त स्वरूप है। सही मायने में उनका अद्वैत दर्शन देश, काल, परिस्थिति आदि सब प्रकार की मानव निर्मित सीमाओं से परे एक विश्व दर्शन है। जिसमें संपूर्ण धरती एवं मानवता का कल्याण निहित है ।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए निदेशक समाज विज्ञान विद्या शाखा, प्रोफेसर संतोष कुमार ने कहा कि मनुष्य को सदैव सकारात्मक एवं ऊर्जा पूर्ण होना चाहिए और ईश्वर पर विश्वास के साथ निष्ठा होनी चाहिए। शंकराचार्य द्वारा स्थापित मानदंडों का अनुकरण करना चाहिए। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन एवम सरस्वती वंदना के साथ किया गया। कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, स्मृतिचिन्ह एवं अंगवस्त्र देकर किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। वाचिक स्वागत भाषण प्रोफेसर संजय सिंह, समाज विज्ञान विद्या शाखा ने प्रस्तुत किया। विषय प्रवर्तन कार्यक्रम समन्वयक व सह आचार्य डॉ0 आनंदानन्द त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुनील कुमार, सहायक आचार्य, समाज विज्ञान विद्या शाखा ने किया।

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