Homeधर्मभागवत कथा के विश्राम दिवस पर बताई जीने की कला

भागवत कथा के विश्राम दिवस पर बताई जीने की कला

श्रीमद् भागवत कथा सुनने मात्र से होती है मोक्ष की प्राप्ति: देवानंद जी महराज

धारा लक्ष्य समाचार(शिवांशु मिश्रा)

जगदीशपुर अमेठी।क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सभा अंकरा में पिछले सात दिनों से चल रही श्रीमद्भागवत कथा का मंगलवार दोपहर समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन कथा व्यास आचार्य देवानंद जी महराज ने कथा का सारांश कर जीवन को जीने की कला भी समझाई। कई उपदेशात्मक वृतांत सुनाकर भक्तों को निहाल भी किया।मिश्रा परिवार की ओर से 13 मई को श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया था। कथा अयोध्या धाम से पधारे आचार्य देवानंद मिश्रा जी महाराज ने सुनाकर भक्तों को भाव विभोर किया।कथा के अंतिम दिन रविवार को कथा व्यास ने सातों दिन की कथा का सारांश किया। उन्होंने बताया कि जीवन कई योनियों के बाद मिलता है। इसे कैसे जीना चाहिए, यह भी समझाया। सुदामा चरित्र को विस्तार से सुनाया।

कृष्ण और सुदामा की निश्छल मित्रता का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे बिना याचना के कृष्णा ने गरीब सुदामा का उद्धार किया। मित्रता निभाते हुए सुदामा की स्थिति को सुधारा। गौ वध का विरोध और गौ सेवा करने पर भी देवाचार्य ने जोर दिया।अंत मे मुख्य यजमान पंडित कैलाश नाथ मिश्रा ने सभी का आभार जताया।वही कथा के विश्राम दिवस पर कथा श्रवण करने पहुंचे दो दर्जन से अधिक संभ्रांत जनों को कथा व्यास जी द्वारा आशीर्वाद स्वरूप अंगवस्त्र भेंट किया गया।

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