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श्रीमद् भागवत कथा में कंस वध रुक्मणी श्री कृष्ण के विवाह का वर्णन

धारा लक्ष्य समाचार

मऊरानीपुर । ग्राम घाटकोटरा स्थित नरसिंह मंदिर परिसर में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत पुराण के वाचक आचार्य पंडित अरुण कृष्ण रावत धायपुरा ने कंस वध व रुकमणी विवाह के प्रसंगों का चित्रण सहित मनोहारी वर्णन करते हुए भगवान विष्णु के पृथ्वी लोक में अवतरित होने के प्रमुख कारण रहे जिसमें से एक राक्षस कंस मामा का वध भी है। कंस के अत्याचार से जब पृथ्वीवासी त्राहिमाम करने लगे तब विष्णु भगवान ने कृष्ण के रूप में कंस की बहिन देवकी की कोख से जेल में जन्म लिया। कंस को यह मालूम था कि मेरा वध श्रीकृष्ण के हाथों होना सुनिश्चित है। इस लिए उसने बाल्यावस्था में ही श्रीकृष्ण को अनेकों बार मारने का प्रयास कराया लेकिन वह हर बार असफल रहा। जिससे 11 वर्ष की अल्प आयु में कंस ने अकरुर के द्वारा मल्ल युद्ध के बहाने कृष्ण, बलराम को मथुरा बुलाकर शक्तिशाली योद्धाओं के अलावा पागल हाथियों से कुचलवाकर कृष्ण को मारने का भी भरकर प्रयास किया गया।

जिसमें वे सभी श्रीकृष्ण, बलराम के हाथों मारे गए। श्रीकृष्ण ने कंस का वध कर मथुरा नगरी को कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिलाकर देवकी, वासुदेव, उग्रसेन को कारागार से मुक्त कराकर उग्रसेन को पुनः मथुरा का नरेश बना दिया। भगवताचार्य ने आगे पुराण की कथा में कहा कि रुकमणी जिन्हें माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है वह विदर्भ साम्राज्य की पुत्री थी, जो विष्णु रूपी श्रीकृष्ण भगवान से विवाह करने के लिए इच्छुक थी। लेकिन रुकमणी के पिता व भाई इससे सहमत नही थे। जिससे उन्होंने रुकमणी के विवाह में जरासंध और शिशुपाल को विवाह में आमंत्रित किया। जैसे ही इसकी जानकारी रुकमणी को हुई तो उन्होंने अपने दूत के माध्यम से अपने मन की बात श्रीकृष्ण के पास पहुंचा दी। जिससे संघर्ष व युद्ध के बाद अंततः श्रीकृष्ण का विवाह रुकमणी से संपन्न हुआ। कथा यजमान सीता शैलेंद्र सिंह भदौरिया ने पुराण की आरती। वेदपाठी के रूप में पंडित रोहित पांडेय गरौठा, वाद्य यंत्रों पर दीपू सिलौरी, राघवेंद्र कुशवाहा, शत्रुघ्न पटेल आदि संगत दे रहे है। कथा में सुदर्शन सिंह राजावत राजीव दीक्षित, राकेश सिंह, गजेन्द्र सिंह सिकरवार, हम्मीर सिंह, बिंद्रावन सिंह, श्रंगार सिंह, सुरेन्द्र द्विवेदी, राहुल सिंह सोलंकी पहलाद सिंह गौर हरपाल सिंह अजय सिंह कुन्नू राजा लाल सिंह दाऊ आदि मौजूद रहे।

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