Homeपुलिसश्रीमदभागवत कथा में करुण रस की वही व्यार

श्रीमदभागवत कथा में करुण रस की वही व्यार

धारा लक्ष्य समाचार

भगवान श्रीकृष्ण ने सिखाया मित्र से बढ़कर कोई धर्म नही-चतुर्वेदी

कोंच(जालौन) मुहल्ला तिलक नगर नरिया स्थित न्यू पुष्पा गार्डन में  श्रीमद्भागवत कथा के कथा बाचक पं. मनोज चतुर्वेदी आचार्य ने पारीक्षित श्रीमती पुष्पा बिनोद कुमार गोस्वामी की मोजूदगी में सुदामा चरित्र की कथा सुनाई जिसे सुन भक्त भाव बिभोर हो गए कथा का रसपान कराते हुए भागवताचार्य ने कहा कि संसार में  बिना मित्र के सुख नही मिलता विपत्ति के समय में ही हमें सच्चे मित्र की पहचान होती है अगर आपके पास सच्चा मित्र है तो यह सब सुखो की खान है उन्होने सुदामा चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा की मित्रता करनी है तो प्रभू से सीखे एक तरफ निर्धन ब्राह्मण और दूसरी तरफ त्रिलोकी राजा प्रभू ने जो मित्रता की मिसाल दी है वह अदभुत है जब सुदामाजी भगवान श्रीकृष्ण जी से मिलने के लिए संकोच करते हुए जैसे ही उनके महल में पहुंचे तो द्वार पालो ने श्री कृष्ण को बताया की एक ब्राह्मण द्वार पर खडा है बो अपना नाम सुदामा बता रहा है तो इतनी बात सुनकर ही भगवान श्रीकृष्ण नंगे पैरों दौडे चले आऐ यह देख सभी हैरत में पड गये इस गरीब ब्राह्मण के लिए प्रभू ऐसे व्याकुल होकर दौडे चले आए प्रभू जी ने सुदामा जी को देखते ही अपने गले लगाया और आदर सत्कार के साथ उन्हें राज महल में  ले गये और अपने सिंघासन पर बैठाकर उनका स्वागत सत्कार  किया फिर उनका हाल चाल जाना सुदामा की पोटली को खोल कर देखा तो उसमें सिर्फ तीन मुठठी चावल निकला प्रभू ने तीन मुठठी चावल के बदले सुदामा जी को तीन लोक देने लगे यह देख रूकमणी जी ने भगवान से कहा हे प्रभु ये कैसा हिसाब है तीन मुठठी चावल के बदले तीन लोक दे रहे है तब प्रभू ने रूकमणी को समझाते हुए कहा मेरा तो हमेशा से ही सीधा हिसाब रहा है इस समय मेरे मित्र की पूर्ण सम्पति तीन मुठठी चावल है और वह मुझे देने में संकोच नहीं कर रहा तो फिर मुझे अपनी सम्पति देने में संकोच क्यों  करूँ यह सुन रूकमणी जी बोली धंन्य है प्रभु आपन लीला आप ही जाने आप धन्य है इस अवसर सुनीता दीप कुमार अंजली रबिन्द्र कुमार अल्पना नरेंद्र कुमार और मोहनी संजय सहित र सहित तमाम स्रोता गढ़ मौजूद रहे।

RELATED ARTICLES

Most Popular