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नेपाल से चलकर देवीपाटन पहुंची पीर रतननाथ की शोभा यात्रा

धारा लक्ष्य समाचार

विनय कुमार
बलरामपुर ब्यूरो चीफ

मित्र राष्ट्र नेपाल के दांग चौखड़ा से पीर रतन नाथ योगी जी की शोभायात्रा नवरात्र के पांचवें दिन शनिवार को शक्तिपीठ देवीपाटन पहुंची।


भारत नेपाल की सीमा पर स्थित प्रसिद्ध 51शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर दोनों देशों की धार्मिक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों की प्रगाढ़ता की निशानी है हर साल यहां चैत्र नवरात्र में नेपाल से बाबा रतन नाथ की ऐतिहासिक पात्र देवता के रूप में शोभायात्रा आती है जो देवीपाटन मंदिर में आकर ठहरती है यह यात्रा न केवल भारत नेपाल के लिए बल्कि सात समंदर पार रहने वाले लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी रहती है। नेपाली मीडिया की लीला शाह ने बताया इस वर्ष रथ से शोभा यात्रा में नेपाल राष्ट्र के धार्मिक सांस्कृतिक सामाजिक संस्थाओं के अलावा मीडिया जगत से भी लोगों ने हिस्सा लिया अपने पारंपरिक वेशभूषा में नेपाली भक्तों ने नृत्य करते हुए लोगों का ध्यान केंद्रित किया । आस्था का हुजूम स्थानीय मिल चुंगी नाके से प्रारंभ हुआ जो पुरानी बाजार होते हुए देवीपाटन के प्रसिद्ध दालीचा में स्थापित किया गया। ज्ञात हो कि नेपाल के दांग प्रान्त से अमृत कलश यात्रा हर साल निकलती है। शोभा यात्रा के दौरान श्रद्धालु अपने आराध्य देवता और अक्षय पात्र के साथ भारत आते हैं इस यात्रा में लगभग 9 दिन का समय लगता है। जनकपुर महादेव मुक्तेश्वर नाथ मंदिर पर दो दिन ठहराव के बाद स्थानीय नकटी पुल पर कुट्टी बाबा स्थान पर पूजा पाठ कर रवाना हो जाते हैं। ऐसा बताया जाता है सिद्ध पीर बाबा रतन नाथ गुरु गोरखनाथ के शिष्य थे तथा मां पाटन पाटेश्वरी के प्रति अगाध श्रद्धा थी बाबा प्रतिदिन मां के दर्शन के लिए दांग से आते थे।जनश्रुति के अनुसार लगभग 700 वर्ष तक पीर रतननाथबाबा जीवित रहे गोलोक वासी होने के बाद गुरु गोरखनाथ द्वारा दिए गए अमृत कलश को बाबा रतन नाथ के प्रतिनिधि के रूप में नेपाल के दांग से देवीपाटन लाया जाता है बताते हैं इस अमृत कलश के दर्शन मात्र से ही भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं इसलिए इस कलश के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।


51 शक्तिपीठों में एक देवीपाटन शक्तिपीठ का पूरे देश में प्रख्यात महत्ता है। यह सिलसिला विक्रम संवत 809 से शुरू हुआ था। शोभायात्रा प्रतिवर्ष चैत्र नवरात्र के पंचमी के दिन शक्तिपीठ पाटन पहुंचती है। बताया जाता है कि बाबा रतन नाथ आठ प्रकार के सिद्धियों के स्वामी थे।


नेपाल के पुजारी संभालते हैं कमान:-शिव अवतार गुरु गोरखनाथ के शिष्य रतन नाथ की पूजा से मां पाटेश्वरी इतना प्रसन्न हुई इनसे कोई वरदान मांगने को कहा तब रतन नाथजी ने कहा माता मेरी प्रार्थना है यहां आपके साथ मेरी भी पूजा हो। देवी ने उन्हें मनचाहा वरदान दे दिया तभी से माता पाटेश्वरी मंदिर प्रांगण में स्थापित दालीचा में अमृत कलश को स्थापित कर नवमी तक पूजा होती है और दशमी को बाबा की विदाई हो जाती है। पूजा के दौरान घंटे व नगाड़े नहीं बजाए जाते हैं। मां पाटेश्वरी की पूजा सिर्फ रतन नाथ जी के पुजारी द्वारा की जाती है। शोभायात्रा के साथ आए पुजारी 5 दिनों तक मंदिर के पुजारी को विश्राम देकर पूजा की कमान खुद संभालते हैं। शोभा यात्रा को ऐतिहासिक बनाने के लिए नेपाल राष्ट्र के अनेक विशिष्ट अतिथिगण अधिसंख्य नेपाली नागरिक अपने पारंपरिक वेशभूषा में सम्मिलित रहे।स्थानीय नकटी नाले पर स्वागत के लिए प्रसिद्ध कथावाचक युवा संत सर्वेश जी महाराज ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि प्रवीण सिंह विक्की यात्रा समिति अध्यक्ष दिलीप गुप्ता साकेत मिश्रा विधायक कैलाशनाथ शुक्ला शैलेश सिंह शैलू विष्णु देव गुप्ता विकास सोनी विवेक मोदनवाल रामदयाल सोनी विश्राम सिंह राजू गुप्ता सोनू पाल एडवोकेट चरन शर्मा सहित सैकड़ो लोग उपस्थित रहे। यात्रा के दौरान हाथी पर सवार सभासद मीना किन्नर पुष्प वर्षा कर रही थी तथा भक्तगण जय भवानी जय गोरखनाथ व जय रतन नाथ का उद्घोष कर रहे थे। शोभायात्रा देवीपाटन पहुंचने पर पीठाधीश्वर योगी मिथलेश नाथ ने विधि विधान से पीर रतन नाथ का स्वागत किया तथा उन्हें प्रसिद्धि दालीचे में स्थापित कराया इस दौरान धीरेंद्र सिंह धीरू राम प्रसाद सिंह डीपी सिंह सेवादार अरुण गुप्ता श्याम तिवारी विजय सिंह आदि उपस्थित रहे सुरक्षा की दृष्टि से उप जिलाधिकारी अभय सिंह अपर पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पुलिस उपाधीक्षक राघवेंद्र सिंह स्थानीय प्रभारी निरीक्षक अशोक सिंह अवधेश राज सिंह तथा अखिलेश पांडे एवं स्थानीय महिला पुरुष आरक्षी के अलावा पंजाब की भी पुलिस बल उपस्थिति रही।

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