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बाराबंकी: आखिर किसने वायरल कराया वीडियो: प्रकरण के बाद बाराबंकी में फिर दावेदारी शुरू, बड़ा सवाल-

प्रत्याशी घोषित करने के बाद ही क्यों किया गया वायरल

लखनऊ
सांसद उपेंद्र रावत का आपत्तिजनक वीडियो टिकट की घोषणा के बाद रविवार को जारी किया गया था। ऐसे में सवाल यही है कि सांसद का टिकट कटने से किसको फायदा हो सकता है।
आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के मामले में बाराबंकी सांसद उपेंद्र रावत ने सोमवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात की। उनसे मामले की जल्द जांच कराने का आग्रह किया। रावत ने बताया कि मेरी छवि धूमिल करने लिए वीडियो वायरल किया गया है। कुछ लोगों को मुझे दोबारा टिकट मिलना गंवारा नहीं था इसलिए एडिटेड वीडियो वायरल किया गया। यह घिनौना कृत्य जिन लोगों ने किया है उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। पार्टी प्रत्याशी हूं, जांच में निर्दोष साबित होने के बाद ही चुनाव लडूंगा।

वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा में बाराबंकी से टिकट की दावेदारी फिर शुरू हो गई है। पूर्व सांसद एवं प्रदेश महामंत्री प्रियंका रावत, पूर्व आईएएस अधिकारी राम बहादुर और पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष शशांक कुशमेश सहित अन्य नेता अपनी दावेदारी जता रहे हैं। सभी को उम्मीद है कि वीडियो वायरल होने के बाद उपेंद्र के टिकट पर पार्टी पुनर्विचार कर सकती है।

प्रत्याशी घोषित करने के बाद ही क्यों किया गया वायरल
लोकसभा चुनाव के समय भाजपा सांसद उपेंद्र रावत का वीडियो वायरल होने के बाद सत्ता और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का दौर शुरू हो गया है। सोमवार को जगह-जगह यही चर्चा रही कि आखिर चुनाव के समय यह वीडियो किसने वायरल कराया। यदि वीडियो सही भी है तो उपेंद्र को प्रत्याशी घोषित करने के बाद ही क्यों वायरल किया गया। उपेंद्र का टिकट कटा तो किस-किस को फायदा हो सकता है?

बड़ा सवाल, अब कौन लड़ेगा चुनाव?
वीडियो प्रकरण के बाद जिले की राजनीति में तेजी से बदलाव हुआ। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर चुनाव कौन लड़ेगा ? इसे लेकर पूरे दिन चर्चा होती रही। इस घटनाक्रम ने भाजपा के साथ ही सपा का समीकरण भी काफी हद तक प्रभावित किया है।

बाराबंकी की सियासत पर भारी पड़े 48 घंटे
सांसद उपेंद्र सिंह रावत को शनिवार शाम पार्टी ने दोबारा टिकट देने की घोषणा की। इसे लेकर खुशियां मनाई गईं। सांसद ने इसका श्रेय जनता को दिया। टिकट को लेकर अटकलें थम गई थीं। लेकिन रविवार दोपहर वायरल हो रहे वीडियो ने भूचाल ला दिया। शाम को शहर कोतवाली में केस दर्ज हुआ। रात जैसे तैसे बीती और सोमवार दोपहर सांसद का निर्दोष साबित होने तक कोई चुनाव नहीं लड़ने का बयान आ गया। ऐसे में 48 घंटे बाराबंकी की सियासत पर भारी पड़ी।

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