Homeमनोरंजनहमारी सनातन संस्कृति की पहचान है भारतीय हिंदू नव वर्ष

हमारी सनातन संस्कृति की पहचान है भारतीय हिंदू नव वर्ष

हंसी का बवंडर बिहारी लाल अम्बर

रिपोर्ट: शिवांशु मिश्रा

मुसाफिरखाना अमेठीभारतीय नव वर्ष की पूर्व संध्या पर श्री नव संवत्सर आयोजन समिति के पदाधिकारीयो द्वारा 13वां विशाल का सम्मेलन का आयोजन किया गया l कवि सम्मेलन में दूर-दराज से आए कवियों ने अपने-अपने अंदाज में लोगों को हंसाया वही मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग सुल्तानपुर विभाग प्रचारक श्री प्रकाश संबोधित करते हुए कहा कि ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि का प्रारंभ भगवान राम का राज्याभिषेक सिंधी समाज के प्रमुख संत झूलेलाल महाराज का उतरन दिवस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक हिंदू राष्ट्र के इरादक परम पूज्य डॉक्टर केशोराव बलिराम हेडगेवार का जन्म दिवस है इस दिन को हम सभी सनातनी भारतीय हिंदू नव वर्ष के रूप में मानते हैं और सहविभाग प्रचारक ओमप्रकाश जगदीशपुर जिला प्रचारक ऋषभ को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।वही अतिथि के रूप में जीएसटी कमिश्नर भूपेंद्र शुक्ला उपस्थित रहे।वही आयोजन समिति के पदाधिकारी अतुल सिंह ने कहा कि इसी दिन के सूर्योदय से ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की प्रारंभ की सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया उन्हीं के नाम पर विक्रम संवत का पहला दिन प्रारंभ होता है।वही कार्यक्रम के आयोजक राहुल कौशल विद्यार्थी ने कहा कि प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक का दिन यही है शक्ति और भक्ति के 9 दिन अर्थात नवरात्र का पहला दिन यही है सिखों के द्वितीय गुरु अंगद देव का जन्म दिवस है।स्वामी दयानंद सरस्वती ने इसी दिन और समाज की स्थापना की एवं कृणवंतो विश्वमआर्यम का संदेश दिया कार्यक्रम का संचालन बलराम अग्रहरि ने किया।जिसमें कवियों कि भूमिका में पुष्कर सुल्तानपुरी ने कहा कि हम आंखों में सर्दी गर्मी, बरसात का मौसम रखते हैं,दो बूंद गिराने से मेरे,सावन को पसीना आता है।बेरुख नदियों को क्या मालुम,हम सागर हैं, सह लेते हैं,है कौन भला इस बस्ती में,नदियों को जो भड़काता है। कवियों में शिबेस राजा ने कहा जब पल्लवित नव पत्र होकर मुस्कुराता है जब गीत नूतन वर्ष का मौसम सुनाता है जब ब्रह्म खुद सृष्टि की रचना गढ़ने लगते हैं जब राम सिंहासन की ओर बढ़ने लगते हैं जब मिलकर समूची मेदिनी भी गुनगुनाती है जब कोकिला,आकाश में गीतों को गाती है.तब हम प्रकृति की गोद में घर को सजाते हैं.चैत्रशुक्ल प्रतिपदा पक्ष हिन्दू नववर्ष मनाते हैंl कवियों में लवलेश यदुवंशी ने कहा “भरत की आँख में आँसू कभी पलने नहीं देना,प्रभू श्री राम को वनवास में चलने नहीं देना,अयोध्या में बना मंदिर मगर मन से निवेदन है,किसी सीता को फिर से आग में जलने नहीं देना”l कवित्रियों में आकांक्षा बुंदेला कहा कि सबरी के जूठे बेर भी खाते हैं राम जी।सद्भाव रखो मन में सिखाते हैं राम जी। वन के सभी दुखों को हँस करके है सहा,कठनाई में जीना भी सिखाते हैं राम जी कवियों में इंदु सुल्तानपुरी, विकास चौरसिया,संचालन प्रयागराज से आए हास्य कवि बिहारी लाल अम्बर ने किया दीपेंद्र तन्हा रायबरेली आदि ने काव्यपाठ किया।जिसमें आयोजन समिति के उदय सिंह, अंशुमान टंडन, अभिषेक तिवारी, लवकुश चौरसिया, शिवम मौर्य, बबलू बरनवाल, विवेक अग्रहरी,पवन जायसवाल अभय दुबे,विनय तिवारी,शैलेंद्र प्रवीण आदि पदाधिकारीगण हजारों की संख्या में उपस्थित रहे।

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