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अंबेडकर नगर से BSP सांसद चुनाव से ठीक पहले BJP में शामिल, इस बार कड़ा होगा मुकाबला

धारा लक्ष्य समाचार पत्र


अम्बेडकरनगर।
अंबेडकर नगर संसदीय सीट का राजनीतिक इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है। यह सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई, इससे पहले इस सीट का नाम अकबरपुर संसदीय सीट हुआ करता था। 2009 के चुनाव में बसपा के टिकट पर राकेश पांडेय को यहां से जीत हासिल हुई थी।


लोकसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासी हलचल लगातार बनी हुई है। समाजवादी पार्टी समेत कई दलों की ओर से चुनाव को लेकर प्रत्याशियों के नाम का ऐलान भी कर दिया गया है। बीजेपी इस बार उत्तर प्रदेश में प्लस 75 का नारा लगा रही है वहीं विपक्षी दल भी अपनी रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं।

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अंबेडकर नगर संसदीय सीट पर फिलहाल बहुजन समाज पार्टी का कब्जा है, लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले पिछले महीने फरवरी में बसपा सांसद रितेश पांडेय पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी में चले गए हैं, ऐसे में यहां पर सियासी समीकरण ही बदल गया है, वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच चुनावी गठजोड़ हो चुका है, ऐसे में इस बार यहां के चुनावी जंग पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।
29 सितंबर 1995 को अयोध्या (फैजाबाद) से अलग कर बनाए गए अंबेडकर नगर जिले का मुख्यालय अकबरपुर ही है, 5 तहसीलों और 10 ब्लॉकों में बंटे अंबेडकर नगर जिले का कुल क्षेत्रफल 2,350 वर्ग किमी है, साल 1566 में जब मुगल बादशाह अकबर यहां आया तो वह जिस स्थान पर ठहरा उसे आज तहसील तिराहे के नाम से जाना जाता है उन्होंने तहसील तिराहे के पास एक मस्जिद भी बनवाई और आज यह किले वाली मस्जिद के नाम से जानी जाती है। इसी दौरान उन्होंने एक बस्ती भी बसायी जिसे अकबरपुर नाम दिया गया और यही शहर आज की तारीख में जिला मुख्यालय के रूप में जाना जाता है।


अंबेडकर नगर संसदीय सीट के तहत 5 विधानसभा सीटें आती है, जिसमें कटेहरी, टांडा, अलापुर, जलालपुर और अकबरपुर सीट शामिल है, 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था, और उसका यहां पर खाता तक नहीं खुला था. यहां की सभी पांचों सीटों पर समाजवादी पार्टी को जीत मिली थी, अकबरपुर सीट से रामअचल राजभर तो वहीं जलालपुर सीट को राकेश पांडेय को जीत मिली, राकेश पांडेय सांसद रितेश पांडेय के पिता हैं और वह सांसद भी रहे हैं।
2019 के लोकसभा चुनाव में अंबेडकर नगर संसदीय सीट के परिणाम को देखें तो यहां पर मुख्य मुकाबला बीजेपी और बसपा के बीच था, चुनाव से पहले सपा और बसपा के बीच गठबंधन हुआ था जिसमें यह सीट बसपा के हाथ लगी. पार्टी में यहां पर चुनाव में भी फायदा हुआ, बीजेपी के मुकुट बिहारी और बसपा के रितेश पांडेय के बीच कड़ा मुकाबला रहा, मुकुट बिहारी को 468,238 वोट मिले तो रितेश पांडेय 564,118 वोट मिले।


बसपा के उम्मीदवार रितेश पांडेय ने यह मुकाबला 95,880 मतों के अंतर से जीत लिया,तब के चुनाव में अंबेडकर नगर संसदीय सीट पर कुल वोटर्स की संख्या 17,44,287 थी जिसमें पुरुष वोटर्स की संख्या 9,38,958 थी तो महिला वोटर्स की संख्या 8,05,275 थी. इसमें से कुल 10,90,152 (63.2%) वोटर्स ने वोट डाले. चुनाव में NOTA के पक्ष में 11,344 वोट पड़े।
अंबेडकर नगर संसदीय सीट के राजनीतिक इतिहास की बात करें तो इस सीट का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है, यह सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई, इससे पहले इस सीट का नाम अकबरपुर संसदीय सीट हुआ करता था. 2009 के चुनाव में बसपा के टिकट पर राकेश पांडेय को यहां से जीत हासिल हुई थी. हालांकि 2014 के संसदीय चुनाव में देश में मोदी लहर का असर दिखा और यह सीट भी बीजेपी के खाते में आ गई।
बीजेपी के टिकट पर हरिओम पांडे मैदान में थे, उन्होंने चुनाव में बसपा प्रत्याशी और सांसद राकेश पांडेय को 1,39,429 मतों के अंतर से हराया था,सपा के राम मूर्ति वर्मा तीसरे स्थान पर रहे थे, फिर 2019 के चुनाव में राकेश पांडेय के छोटे बेटे और बसपा प्रत्याशी रितेश पांडेय मैदान में उतरे थे. उन्होंने बीजेपी के मुकुट बिहारी को 95,880 मतों के अंतर से हरा दिया था।
इससे पहले इस सीट का नाम अकबरपुर संसदीय सीट हुआ करता था. इमरजेंसी के बाद 1977 में हुए आम चुनाव में वोटों के लिहाज से एक रिकार्ड बना सका था, चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ हर ओर माहौल बना हुआ था, यहां पर इसका असर दिखा, भारतीय लोकदल के मंगलदेव विशारद को अकेले 78.03 फीसदी वोट मिले और उन्होंने 2,11,826 मतों के अंतर से चुनाव जीता था. जो आजतक रिकॉर्ड है।


अंबेडकर नगर संसदीय सीट पर चुनाव में दलित वोटर्स काफी अहम भूमिका निभाते हैं, बसपा के सांसद रितेश पांडेय अब बीजेपी का दामन थाम चुके हैं, ऐसे में मायावती की पार्टी को यहां पर नया उम्मीदवार तय करना होगा. तो सपा और कांग्रेस फिर से साथ चुनाव लड़ रहे हैं, ऐसे में क्या बीजेपी यहां पर जीत हासिल कर पाएगी।

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