Homeस्वास्थपत्रकार जगत में ग़म,प्रदीप राज की अचानक मौत से सब सन्न

पत्रकार जगत में ग़म,प्रदीप राज की अचानक मौत से सब सन्न

धारा लक्ष्य समाचार

बाराबंकी :दरियाबाद के रहने वाले पत्रकार प्रदीप राज की अचानक मौत ने हम सभी को एक गहरी आहति में डाल दिया है। उनका निधन एक युवा पत्रकार के न सिर्फ खोई गई जिंदगी का अंत करता है, बल्कि एक अच्छे और सक्रिय नागरिक की भूमिका को भी नुकसान पहुंचाता है। उनकी मौत की खबर सुनकर सभी के मन में गहरा शोक है। रामसनेही घाट में अंतिम संस्कार हुआ, राहुल जैसवाल, काशीनाथ,अजय ठाकुर,कृष्ण कसेरा ,सचिन गुप्ता,जय शंकर पांडेय,अनिल कनौजिया ने परिवार वालो की सांत्वना दी।

दरियाबाद कस्बे के रहने वाले थे पिता स्टेशन मास्टर थे कॅरोना काल मे देहांत हो गया कुछ दिन बाद इसी ग़म में माता जी भी चल बसी।
सरकार के आदेशों को पालन करने में हमेशा सक्रिय रहे कॅरोना के टीके भी लगवाए, बूस्टर भी लगवाया ,उसी जगह फोड़ा बन गया है और हार्ट अटैक के बाद परिवार साथियों को रोता बिलखता छोडक़र चले गए। डेढ साल पूर्व हुई थी शादी । पीछे विधवा के अलावा दो भाई और बहन है।

तहलका टुडे के एडिटर रिज़वान मुस्तफ़ा कहते है प्रदीप राज एक प्रेरणास्त्रोत थे, जो नवीनतम समाचारों को प्रस्तुत करके समाज में संवेदनशीलता और जागरूकता फैलाते थे। उनका अचानक निधन हमें एक दुर्भाग्यपूर्ण सत्य से निपटना पड़ रहा है। उनके जाने से हम सभी खोजते हैं, कि क्या हम कुछ कर सकते थे, क्या हम ने उन्हें उनकी खोई हुई जिंदगी में सहारा दिया?

वरिष्ठ पत्रकार अंकित गुप्ता कहते है उनकी मौत ने हमें यह भी याद दिलाया है कि जिंदगी कितनी अनमोल होती है, और हमें हर पल को महत्व देना चाहिए। उनके पारिवारिक संबंधी, मित्र, और सहकर्मी उनकी अनुपस्थिति का आभास कर रहे हैं और उनके निधन का दुःख सह रहे हैं।

वरिष्ठ पत्रकार और महंत बीपी दास बाबा जी कहते है हम सभी प्रदीप राज की यादों को समर्थन देते हैं और उनके प्रेरणास्त्रोत को निरंतर जीवित रखने का संकल्प लेते हैं। उनकी मौत हमें यह शिक्षा देती है कि हमें अपनी सेहत और कुशलता की प्राथमिकता देनी चाहिए, और जिंदगी को संवेदनशीलता और साहस के साथ जीना चाहिए।

आज तक के ब्यूरो चीफ रेहान मुस्तफ़ा कहते है प्रदीप राज की यादों को समर्थन और सम्मान के साथ जिन्दा रखना हम सभी का कर्तव्य है। उनकी मौत एक बड़ी क्षति है, लेकिन हम उनके आत्मा को शांति प्रदान कर सकते हैं और उनके परिवार के साथ साथिकता और समर्थन जताकर उन्हें साहस दे सकते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार और हिंदी पत्रकार एसोसिएशन के प्रदेश अध्य्क्ष कृष्ण कुमार द्विवेदी ने कहा प्रदीप राज की मौत ने हमें एक महत्वपूर्ण सच्चाई को सामने लाने का मौका दिया है: जिंदगी की अनमोलता और उसकी अकल्पनीय मूल्य को समझना।

मोहम्मद वसीक ने कहा उनकी यादों को समर्थन और सम्मान के साथ जिंदा रखना हमारा कर्तव्य है, और हमें उनके कार्यों का आदर्श लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

प्रेस फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्य्क्ष वरिष्ठ पत्रकार हशमतुल्लाह ने कहा प्रदीप राज की मौत एक चेतावनी भी है कि हमें अपनी सेहत और कुशलता की प्राथमिकता देनी चाहिए, और जीवन को संवेदनशीलता और साहस के साथ जीना चाहिए।

वरिष्ट पत्रकार संतोष शुक्ल ने कहा उनकी यादों को समर्थन और सम्मान के साथ जिन्दा रखना हम सभी का कर्तव्य है।

उनके परिवार और ख़ासकर जिसने डेढ़ साल पहले उनके साथ हाथ पीले किये आज वो विधवा बन कर बिलख रही है,हम सबको गहरा संवेदनशीलता और साथ देना चाहिए, ताकि उन्हें इस कठिन समय में सहानुभूति और समर्थन मिल सके।

सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा हमें उनकी यादों को समर्थन और सम्मान के साथ जिन्दा रखना हमारा कर्तव्य है, और हमें उनके प्रेरणास्त्रोत को निरंतर जीवित रखने का संकल्प लेना चाहिए।

RELATED ARTICLES

Most Popular