Varanasi UP…ईद-उल-फित्र त्याग, अनुशासन और भाईचारे का पर्व: शशांक शेखर त्रिपाठी।

ईद-उल-फित्र त्याग, अनुशासन और भाईचारे का पर्व: शशांक शेखर त्रिपाठी।

वाराणसी। वरिष्ठ अधिवक्ता एवं दी बनारस बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष तथा भारतीय जनता पार्टी, विधि प्रकोष्ठ काशी क्षेत्र के संयोजक शशांक शेखर त्रिपाठी ने देशवासियों, विशेषकर मुस्लिम समुदाय को ईद-उल-फित्र की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि ईद का पर्व त्याग, अनुशासन, भाईचारे और अल्लाह के प्रति समर्पण का प्रतीक है, जो समाज में सद्भाव और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करता है।
रमज़ान के पवित्र महीने की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इस्लाम में रोज़ा केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मसंयम, आध्यात्मिक शुद्धि और सामाजिक जिम्मेदारी का माध्यम है। कुरान शरीफ में रोज़े को परहेज़गारी प्राप्त करने का जरिया बताया गया है। सहरी से शुरू होकर सूर्यास्त तक चलने वाली यह साधना व्यक्ति के विचार, व्यवहार और आचरण को भी संयमित करती है।
इफ्तार की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि सूर्यास्त के समय खजूर और पानी से रोज़ा खोलना सुन्नत है, जिसके बाद मग़रिब की नमाज़ अदा की जाती है। उन्होंने कहा कि इफ्तार केवल भोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और जरूरतमंदों के साथ सहभागिता का अवसर भी है।
अपने संदेश में उन्होंने पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब के जीवन मूल्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका संदेश इंसाफ, अमन और मानवता पर आधारित था। उन्होंने नागरिकों से देश के प्रति निष्ठा और आपसी सद्भाव बनाए रखने की अपील की।
वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने रमज़ान के दौरान मध्य पूर्व में जारी संघर्षों की निंदा की। साथ ही अफगानिस्तान और पाकिस्तान में हो रही हिंसा में निर्दोष लोगों की मौतों को अत्यंत दुःखद बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि कुरान के अनुसार एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या पूरी मानवता की हत्या के समान है, इसलिए सभी को शांति, भाईचारे और न्याय के मार्ग पर चलना चाहिए। अंत में उन्होंने सभी नागरिकों से समाज में सौहार्द और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की अपील की।

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