कलेक्ट्रेट सभागार में अनुदेशकों का सम्मान समारोह, बढ़े मानदेय पर जताई खुशी
शिक्षा और संस्कार दोनों को मजबूत करने में शिक्षकों की भूमिका अहम
धारा लक्ष्य समाचार
जिला संवाददाता शफीक अहमद
सीतापुर। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शिक्षकों और विद्यालयों में बच्चों के श्रमदान को लेकर दिए गए बयान की शिक्षा जगत में व्यापक चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब किसी विद्यालय में बच्चे श्रमदान करते हुए दिखाई देते हैं तो उसमें गलत कुछ भी नहीं है, बल्कि ऐसे शिक्षक देश की भावी पीढ़ी को हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे वायरल वीडियो पर शिक्षकों से जवाब-तलब करने के बजाय उन्हें बुलाकर सम्मानित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में सामने आया है जब प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षकों के सम्मान को बढ़ाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।
इसी क्रम में जनपद मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में रविवार को अनुदेशकों के बढ़े हुए मानदेय वितरण को लेकर भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के कारागार राज्य मंत्री सुरेश राही ने की। समारोह में भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ल, नगर पालिका अध्यक्ष नेहा अवस्थी, जिलाधिकारी डा. राजागणपति आर., मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जोशी तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अखिलेश प्रताप सिंह सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में अनुदेशक मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 17 चयनित अनुदेशकों को प्रतीकात्मक रूप से ₹17 हजार की बढ़ी हुई मानदेय राशि का चेक, शॉल एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
समारोह में परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने वातावरण को उत्सवमय बना दिया। स्वागत गीत और रंगारंग प्रस्तुतियों पर सभागार तालियों की गूंज से भर उठा। मंत्री सुरेश राही ने कहा कि प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और अनुदेशकों की भूमिका भविष्य निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है। वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ल ने शिक्षकों को समाज की मजबूत नींव बताते हुए उनके योगदान की सराहना की। कार्यक्रम के अंत में जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर. ने सभी अतिथियों और उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।
समारोह ने जहां अनुदेशकों के सम्मान और मनोबल को नई ऊंचाई दी, वहीं मुख्यमंत्री के संदेश ने शिक्षकों की भूमिका को लेकर सकारात्मक बहस को भी मजबूती प्रदान की।
