21वें दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा प्रहार।
11 मार्च को ‘लखनऊ चलो’ का आह्वान।
वाराणसी, आज श्रीविद्यामठ, केदारघाट, वाराणसी में उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिए गए 40 दिनों के अल्टीमेटम के 20 दिन पूर्ण होने पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अवधि में मुख्यमंत्री की ओर से “हिन्दू होने” के कोई संकेत नहीं मिले, बल्कि गोरक्षा के मुद्दे पर रहस्यमयी मौन दिखाई दिया।
शंकराचार्य ने कहा कि सरकार ने ‘गोदान’ फिल्म को टैक्स-फ्री करने जैसे प्रतीकात्मक कदम तो उठाए, परंतु ‘गाय को राज्य माता घोषित करने’ और ‘गोमांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध’ की मुख्य मांगों पर चुप्पी साधे रखी। उन्होंने ‘20वीं पशुगणना’ के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि पश्चिम बंगाल में गोवंश की संख्या में वृद्धि हुई है, जबकि उत्तर प्रदेश में कमी दर्ज की गई है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की आड़ में उत्तर प्रदेश देश का बड़ा मांस निर्यातक राज्य बना है और यह गोरक्षा के दावों के विपरीत है। साथ ही, उन्होंने संत समाज और अखाड़ों से इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाने का आह्वान किया।
आंदोलन को नया मोड़ देते हुए शंकराचार्य ने 11 मार्च 2026 को ‘लखनऊ चलो’ का आह्वान किया और कहा कि गोमाता को अधिकार दिलाने तक आंदोलन जारी रहेगा।

