काशी की पंचक्रोशी परिक्रमा सनातन धर्म की आत्मा का प्रतीक : मुकेश शास्त्री।
पंचक्रोशी परिक्रमा एवं अंतरगृही यात्रा के संरक्षण के लिए अखिल भारत हिंदू महासभा (अखिल भारत हिन्दू महासभा) का राष्ट्रीय अभियान प्रारंभ।
वाराणसी। सनातन धर्म की आध्यात्मिक राजधानी काशी की प्राचीन एवं दिव्य परंपराओं के संरक्षण और पुनर्जीवन के उद्देश्य से अखिल भारत हिन्दू महासभा ने एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान प्रारंभ करने की घोषणा की है। संगठन के केंद्रीय पर्यवेक्षक मुकेश शास्त्री ने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत काशी की पवित्र पंचक्रोशी परिक्रमा और अंतरगृही यात्रा के संरक्षण, संवर्धन तथा प्रचार-प्रसार हेतु विशेष योजनाएँ लागू की जाएंगी। अपने आधिकारिक वक्तव्य में मुकेश शास्त्री ने कहा कि काशी केवल एक नगर नहीं, बल्कि सनातन धर्म की जीवंत आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है। यहाँ की पंचक्रोशी परिक्रमा हजारों वर्षों से चली आ रही एक दिव्य परंपरा है, जो काशी की आध्यात्मिक सीमा और भगवान शिव की अनंत कृपा का प्रतीक मानी जाती है। उन्होंने बताया कि Skanda Purana के काशी खंड सहित अनेक प्राचीन ग्रंथों में पंचक्रोशी परिक्रमा का विस्तृत वर्णन मिलता है तथा इसे करने वाले श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक फल, पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
उन्होंने कहा कि पंचक्रोशी परिक्रमा लगभग 80 किलोमीटर की परिधि में स्थित काशी की पारंपरिक सीमा का प्रतिनिधित्व करती है। इस परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु पाँच प्रमुख पड़ाव — कर्दमेश्वर, भीमचंडी, रामेश्वर, शिवपुर और कपिलधारा — में रात्रि विश्राम करते हुए भगवान शिव और काशी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। यह परिक्रमा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि काशी की सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक विरासत का भी जीवंत उदाहरण है। मुकेश शास्त्री ने कहा कि वर्तमान समय में पंचक्रोशी परिक्रमा और अंतरगृही यात्रा के अनेक प्राचीन मार्ग, मंदिर एवं धार्मिक स्थल उपेक्षा, अतिक्रमण और जागरूकता की कमी के कारण प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में अखिल भारत हिन्दू महासभा ने इन पवित्र मार्गों और स्थलों के संरक्षण, पुनर्स्थापना तथा व्यापक प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया है।
अभियान के अंतर्गत विभिन्न स्तरों पर समितियों का गठन किया जाएगा, जो पंचक्रोशी परिक्रमा और अंतरगृही यात्रा के मार्गों, मंदिरों तथा धार्मिक स्थलों का सर्वेक्षण करेंगी। इन समितियों का दायित्व प्राचीन धार्मिक स्थलों का संरक्षण, तीर्थ मार्गों का पुनर्जीवन, श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं का विकास तथा यात्राओं के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना होगा। महासभा इस अभियान के तहत एक डिजिटल प्लेटफॉर्म और वेबसाइट भी विकसित करेगी, जिसमें पंचक्रोशी परिक्रमा और अंतरगृही यात्रा से संबंधित सभी धार्मिक स्थलों, मंदिरों, मार्गों तथा उनके ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे देश-विदेश के श्रद्धालुओं को काशी की इस प्राचीन परंपरा को समझने और उससे जुड़ने का अवसर मिलेगा।
केंद्रीय पर्यवेक्षक ने स्पष्ट किया कि काशी की धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत की रक्षा के लिए अखिल भारत हिन्दू महासभा पूर्णतः प्रतिबद्ध है तथा पवित्र मार्गों या स्थलों को नुकसान पहुँचाने वाले तत्वों के विरुद्ध कानूनी एवं सामाजिक स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने काशी के संत-महात्माओं, धर्माचार्यों, विद्वानों, सामाजिक संगठनों और आम श्रद्धालुओं से इस अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील करते हुए कहा कि यह केवल एक धार्मिक यात्रा का संरक्षण नहीं, बल्कि सनातन धर्म की हजारों वर्षों पुरानी आध्यात्मिक परंपरा और भारत की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का संकल्प है।
मुकेश शास्त्री ने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के सहयोग और सामूहिक प्रयासों से पंचक्रोशी परिक्रमा एवं अंतरगृही यात्रा की गौरवशाली परंपरा और अधिक सशक्त तथा संरक्षित होगी, जिससे आने वाली पीढ़ियाँ भी काशी की इस दिव्य आध्यात्मिक धरोहर का लाभ प्राप्त कर सकेंगी। महादेव सरकार फाउंडेशन के प्रतिनिधि हर्षित राय ने कहा कि काशी की पंचक्रोशी परिक्रमा और अंतरगृही यात्रा केवल धार्मिक परंपराएँ नहीं, बल्कि भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना की जीवंत धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि इन पवित्र यात्राओं के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए समाज के सभी वर्गों की सहभागिता आवश्यक है। हर्षित राय ने यह भी कहा कि महादेव सरकार फाउंडेशन इस राष्ट्रीय अभियान में अखिल भारत हिन्दू महासभा के साथ पूर्ण सहयोग करेगा और जनजागरूकता, सेवा-कार्य तथा सांस्कृतिक संरक्षण के माध्यम से काशी की आध्यात्मिक विरासत को सशक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएगा।

