Amethi UP : विकास का अनोखा तमाशा: चमकाई गई पानी टंकी, पर पानी नदारद, अधूरी पाइप लाइनें, खुले गड्ढे और टूटी इंटरलॉकिंग ने खोली हकीकत

धारा लक्ष्य समाचार पत्र

जगदीशपुर/अमेठी। प्रधानमंत्री जलजीवन मिशन पलिया पश्चिम पंचायत में जिस अंदाज़ में लागू हुआ है, उसे देखकर कोई भी कह देगा कि यह योजना नहीं, बल्कि व्यंग्य की सबसे बेहतरीन मिसाल है। पानी की टंकी तो ऐसी चमकाई गई है कि दूर से देखने में मॉडल गांव का एहसास दिलाती है, पर पास जाते ही पता चलता है कि पानी केवल नाम का है — हकीकत में नल अभी तक लगाए ही नहीं गए।

पलिया पश्चिम के गांव—पूरे हरिलाल तिवारी, पूरे गंगा सिंह, पूरे ठाकुर दुबे, मेड़ई पुरवा, गढ़ी, जुग्गा पुरवा, गोंसाई पुरवा, रजखेता और मुन्नू मिश्र—सब जगह हालात लगभग एक जैसे हैं। पाइप लाइन आधी-अधूरी पड़ी है और जहां डाली गई है वहां गड्ढे ऐसे खुले हैं दर्जनों गांव में खुदाई महोत्सव चल रहा हो। टूटी इंटरलॉकिंग पर उगी घास कहानी खुद सुना देती है कि काम हुआ कम और ढोंग हुआ ज्यादा।

गांववासियों का कहना है— “टंकी तो खूब चमकाई गई है, लगता है पानी नहीं तो क्या, टंकी ही देख लो और खुश रहो।”
एक अन्य ग्रामीण ने तंज कसा— “नल तो आज तक लग नहीं पाए, शायद सरकार हमें बिना नल के पानी पीना सिखाएगी।”

जुग्गा पुरवा और मेड़ई पुरवा के लोगों ने बताया कि मजदूर थोड़े दिन आए, पाइप लाइन डालने का नाटक किया और फिर ऐसे गायब हुए कि मानो योजना के साथ-साथ वे भी छुट्टी पर चले गए। रजखेता और गोंसाई पुरवा के निवासी कहते हैं कि इंटरलॉकिंग तोड़कर छोड़ दी गई, लेकिन मरम्मत करना शायद किसी की प्राथमिकता नहीं रही।

सबसे मनोरंजक बात योजना के बोर्ड पर लिखे नम्बर हैं—ग्रामीण बताते हैं कि वो भी महीनों से बंद हैं। शिकायत करने की कोशिश की तो लगा जैसे नंबर भी विकास की तरह ‘साइलेंट मोड’ पर चला गया हो।

गांववासियों की एक बात पूरी तस्वीर साफ कर देती है—
“यहां विकास नहीं, विकास का अभिनय चल रहा है—वही अभिनय जिसमें ताली तो बजती है, पर काम नहीं होता।”

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