बाटी चोखा रेस्टॉरेंट ने मनाई 27वीं वर्षगांठ, पूरे देश में उत्साह के साथ ‘बाटी चोखा डे’
वाराणसी: काशी की पहचान केवल धार्मिक और सांस्कृतिक नहीं, बल्कि अपने पारंपरिक खान-पान के लिए भी है। इसी निराले स्वाद को पिछले 27 सालों से बाटी चोखा रेस्टॉरेंट लोंगो तक पहुंचा रहा है। 25 फरवरी 1999 को इस रेस्टॉरेंट की शुरुआत हुई और आज इसे ‘बाटी चोखा डे’ के रूप में मनाया जा रहा है।
इस अवसर पर बनारस, नोएडा, मिर्जापुर, लखनऊ, कलकत्ता और धनबाद के सभी रेस्टॉरेंट्स के उत्कृष्ट कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र और प्रोत्साहन राशि से सम्मानित किया गया। तेलियाबाग स्थित रेस्टॉरेंट पर बाटी चोखा परिवार के संरक्षक श्री ललित मोहन अग्रवाल ने सम्मानित कर्मचारियों को बधाई दी।
सिद्धार्थ दुबे ने इसे एक छोटे ठेले से रेस्टॉरेंट तक पहुंचाया। शुरुआत में बच्चों की डिमांड और आर्थिक नुकसान जैसी चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने केवल पारंपरिक बाटी चोखा पर ध्यान केंद्रित किया। आज यह रेस्टॉरेंट बच्चों-बुजुर्गों के साथ-साथ देशभर में लोकप्रिय हो चुका है।
वर्तमान में बनारस में तेलियाबाग, डाफी, कलकत्ता में साल्टलेक, लखनऊ के गोमतीनगर और अलीगंज, नोएडा में सेक्टर 104, मिर्जापुर में अहरौरा और धनबाद में इसके रेस्टॉरेंट्स चल रहे हैं। सफलता इस बात से भी जाहिर है कि अब कई रेस्टॉरेंट्स ने इसका अनुसरण किया है, और यह स्वाद पांच सितारा होटलों में भी अपनी जगह बना चुका है।

