काशी में “मसाने की होली।
शिवभक्ति और आध्यात्मिक समरसता का अनूठा उत्सव।
काशी में प्राचीन परंपरा “मसाने की होली” का आयोजन हर वर्ष शिवभक्ति और आध्यात्मिक समरसता के साथ होता है। मणिकर्णिका और हरिशचंद्र घाट पर नागा साधु, अघोर साधक, किन्नर समुदाय और श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के सानिध्य में जीवन-मरण के दर्शन का अनुभव करते हैं। यह 350 वर्ष पुरानी परंपरा अघोरी और नाथ संप्रदाय के संतों द्वारा स्थापित हुई थी।
पिछले वर्षों में कुछ अवांछित प्रवृत्तियों के बावजूद, संत समाज और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से अब इसे पुनः पवित्रता और गरिमा के साथ मनाया जा रहा है। पारंपरिक वाद्य यंत्रों और “बम-बम” के जयघोष के बीच हर सहभागी शिवमय अनुभूति प्राप्त करता है।
श्रद्धालुओं से आग्रह है कि वे धार्मिक मर्यादाओं का पालन करते हुए दर्शन-पूजन करें और इस सनातन परंपरा की पवित्रता एवं आध्यात्मिकता बनाए रखें।

