Siltanpur UP: तीन साल से जमे खंड शिक्षा अधिकारी संतोष पांडेय पर गंभीर आरोप

अपनी ही शिकायतों की खुद करते हैं जांच, फर्जी निस्तारण का आरोप; त्रिस्तरीय जांच की मांग।

संवाददाता आलापुर अम्बेडकरनगर

जनपद अंबेडकरनगर के विकास खंड जहांगीरगंज स्थित बीआरसी देवरिया बुजुर्ग में तैनात खंड शिक्षा अधिकारी संतोष पांडेय पर गंभीर आरोप लगे हैं। स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि खंड शिक्षा अधिकारी पिछले लगभग तीन वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात हैं और उनके खिलाफ की गई शिकायतों की जांच भी स्वयं ही कर रहे हैं,।

जिससे शिकायतों का मनमाने और फर्जी तरीके से निस्तारण किया जा रहा है।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह स्थिति प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है, क्योंकि जिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत की जाती है, वही स्वयं जांच अधिकारी बनकर अपनी ही शिकायतों की सुनवाई कर रहा है।

आईजीआरएस शिकायतों पर भी सवाल बताया जाता है कि मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर दर्ज कई शिकायतों

40017826004371, 40017826004421, 40017826004426, 40017826004430, 40017826004538, 40017826004539, 40017826004815, 40017826004816 तथा 40017826004191 की सुनवाई बीते दिनांक 11 फरवरी और 2026 को और शिकायत संख्या 40017826006558 है मार्च 07/3/ 2026 को प्रस्तावित है।आरोप है कि इन शिकायतों की जांच भी स्वयं खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा बीआरसी कार्यालय में बैठकर की जा रही है और मनमाने फर्जी तरीके से उनका निस्तारण तैयार किया जा रहा है।

एमडीएम खाते की जांच में भी सामने आई थीं अनियमितताएं शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पूर्व में एमडीएम खाते की जांच में अनियमितताएं सामने आने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई और न ही जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। इससे पूरे मामले को दबाने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

दुर्व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न का आरोप शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि बीआरसी कार्यालय में सुनवाई के दौरान उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया जाता है। आरोप है कि खंड शिक्षा अधिकारी शिकायतकर्ताओं से अभद्र भाषा में बात करते हैं तथा शिकायत करने पर उल्टा उन्हें ही परेशान किया जाता है।

त्रिस्तरीय जांच और स्थानांतरण की मांग स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ता ने मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) जनपद अम्बेडकर नगर से मांग की है कि पूरे प्रकरण की जांच शिक्षा विभाग से बाहर की स्वतंत्र एजेंसी या आलापुर उपजिलाधिकारी जैसे किसी निष्पक्ष अधिकारी से कराई जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी का तत्काल प्रभाव से किसी अन्य विकास खंड में स्थानांतरण किया जाए ।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो शिक्षा विभाग में कई अन्य अनियमितताएं भी सामने आ सकती हैं।अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर प्रकरण को कितनी गंभीरता से लेता है और आरोपों की जांच कर क्या कार्रवाई करता है।

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