स्मार्ट मीटर योजना पर बढ़ता जन असंतोष: शिकायतों के समाधान की मांग तेज।

वाराणसी,विगत कुछ वर्षों में विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा लागू की गई स्मार्ट मीटर योजना को लेकर आम उपभोक्ताओं में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। योजना के क्रियान्वयन के बाद से कई प्रकार की शिकायतें और समस्याएं सामने आई हैं, जिनसे विशेष रूप से गरीब, मजदूर, बुजुर्ग और ग्रामीण उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हैं।
प्रमुख शिकायतों में बिना खपत के पैसे कटने, प्रीपेड स्मार्ट मीटर में बैलेंस खत्म होते ही बिजली स्वतः कट जाने, गलत या अप्रमाणिक बिल आने, रिचार्ज आधारित व्यवस्था की जटिलता तथा मोबाइल ऐप और डिजिटल भुगतान प्रणाली के उपयोग में कठिनाई शामिल हैं। इसके अलावा कई स्थानों पर मीटर रीडिंग अपडेट न होने, ऐप के ठीक से कार्य न करने, बैलेंस गलत दिखने तथा रिचार्ज के बाद बिजली बहाल होने में देरी जैसी समस्याएं भी सामने आई हैं। उपभोक्ताओं ने कुछ जगहों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने और शिकायतों के समय पर समाधान न होने के आरोप भी लगाए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इन समस्याओं के पीछे जल्दबाजी में योजना लागू करना, तकनीकी परीक्षण का अधूरा होना, उपभोक्ता जागरूकता की कमी तथा कमजोर शिकायत निवारण प्रणाली प्रमुख कारण हैं। साथ ही गरीब उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं की अनदेखी भी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरी है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए आजाद अधिकार सेना ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इनमें उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों विकल्प उपलब्ध कराना, गलत बिल या कटौती पर तत्काल रिफंड, ग्रामीण क्षेत्रों में ऑफलाइन भुगतान की सुविधा, 24 घंटे हेल्पलाइन और समयबद्ध शिकायत निवारण, मीटरों का पारदर्शी ऑडिट तथा गरीब परिवारों के लिए न्यूनतम बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना शामिल है।
संगठन ने मांग की है कि केंद्र एवं राज्य सरकारें इस विषय को गंभीरता से लेते हुए सभी शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें और उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करने के लिए आवश्यक कदम जल्द से जल्द उठाएं।
इस संबंध में आजाद अधिकार सेना के पदाधिकारियों—उधम सिंह (जिला उपाध्यक्ष), सुरेश सेठ (मंडल अध्यक्ष), काजल कश्यप (जिला अध्यक्ष) एवं संतोष सिंह (मंडल महासचिव)—ने संयुक्त रूप से सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।

