Ujjain Madhya Pradesh: ये साधना शिविरें जो लगवाई जा रही हैं, ये आने वाली बाधा को टालने के लिए लगवाई जा रही हैं – बाबा उमाकान्त जी महाराज

इस समय लोगों की आजादी खतरे में है, आज आप आजाद हो लेकिन कोई जरूरी नहीं है कि कल इसी तरह से आजाद रहो

धारा लक्ष्य समाचार पत्र 

उज्जैन, मध्य प्रदेश परम् पूज्य परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने उज्जैन आश्रम पर 28 अप्रैल से लगे 72 घंटे की अखण्ड साधना शिविर का 1 मई 2026 को समापन करते हुए सतसंग में कहा कि इस समय लोगों की आजादी खतरे में है, आज आप आजाद हो लेकिन कोई जरूरी नहीं है कि कल इसी तरह से आजाद रहो। बहुत बाधा आने का संकेत मिल रहा है, लेकिन ये बाधाएं टल सकती हैं। ये साधना शिविरें जो लगवाई जा रही हैं, ये बाधा को टालने के लिए लगवाई जा रही हैं।

उदाहरण के तौर पर आप समझो कि जैसे जब सूखा-अकाल पड़ता है तब इंद्र और वरुण देवता को खुश करने के लिए यज्ञ हवन करते हैं, उनसे प्रार्थना करते हैं, उनके नाम की ध्वनि करते हैं कि ये खुश हो जाएं और पानी बरसने लग जाए। इसी तरह से संकट को टालने के लिए साधना शिविरें लगवाई जा रही हैं और ‘जय गुरु देव’ नाम की ध्वनि करवाई जा रही हैं। जिससे आगे संकट टले। संकट कम तो होगा लेकिन पूरा कम नहीं हो पाएगा। जितने भी सतसंगी नामदानी अगर यह महसूस करें कि हमारी आजादी खतरे में हैं और इस काम में लग जाएंगे तो 16 आना में से 4 आना ही तकलीफें बचेंगी।

*इस समय पर देश और दुनिया की आजादी कैसे खतरे में है?*

देश और दुनिया की आजादी खतरे में है। आजादी खत्म हो रही है। आजादी किसको कहते हैं? जैसे रात को कोई चला जाए, कोई लूटपाट ना हो, कहीं भी जाए किसी भी समय जाए, औरत कहीं भी चली जाए और उसके साथ छेड़छाड़ ना हो तो वही है आजादी। लेकिन ये चीजें बढ़ती जा रही हैं। आप स्वतंत्र देश के नागरिक हो आपको कहीं भी घूमने की आजादी है लेकिन मान लो अगर कर्फ्यू लग गया तो कोई भी घर से बाहर नहीं निकल सकता है। तो आजादी खत्म हो जाएगी कि नहीं हो जाएगी! तो यह आंतरिक आजादी खतरे में है।

बाहरी आजादी ज्यादा जोर करेगी। जैसे मान लो अभी लड़ाई हो जाए तो क्या डीजल पेट्रोल मिलेगा? नहीं मिलेगा। तो आजादी खतरे में हो जाएगी कि नहीं हो जाएगी? जैसे अभी तक तो बहुत से लोग लापरवाही करते थे; गैस ऐसे ही जल रही है तो जल रही है। लेकिन अब जब गैस बचाना है तब जितनी जरूरत होती है उतनी ही जलाते हैं। तो ऐसे ही आजादी खत्म हो जाएगी।

*टाटधारियों के लिए पूज्य बाबा उमाकान्त जी महाराज का विशेष संदेश*

बहुत से सतसंगियों ने गुरु महाराज के आदेश से टाट पहना था। गुरु महाराज कहा करते थे कि यह बोरा-टाट आम जम्हूरियत का कफ़न है। तो आप जितने भी टाटधारी हो, हमारी नजर में आपकी कीमत है और हम आपसे कुछ काम की अपेक्षा करते हैं। कफन जो पहन लेता है उसको श्मशान घाट जाना रहता है। ऐसे ही कफन पहनने का मतलब है कि हम मुर्दा हो गए, अब हमारी कोई इच्छा नहीं रह गई, हमने यह टाट गुरु के आदेश से पहनी है तो अब जैसा भी वो कहें उसी तरह से करो।

अब भी आप लोगों की जरूरत है, शरीर तो अब आपका कमजोर हो गया लेकिन आपका संकल्प अब काम करेगा। जो तपस्या आप ने जब से उसको पहना है तब से अब तक की है वह अब काम करेगी। उसकी अब जरूरत है। तो जो चल फिर सकते हैं, जो परिवार के लोग उनको ला सकते हैं, उनको इस वार्षिक भंडारे में जो 13, 14,सी 15 मई 2026 को उज्जैन आश्रम पर होगा, उसमें ले आएं। मैं उनके लिए कुछ सोच रहा हूं। उनसे कुछ कहना चाहता हूं, उनसे कुछ कराना चाहता हूं।