धारा लक्ष्य समाचार पत्र
अमेठी।
कृषि विज्ञान केंद्र कठौरा में नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना के अंतर्गत कृषि विभाग द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण का शुक्रवार को समापन हुआ। यह प्रशिक्षण कृषि सखियों और CRP को प्राकृतिक खेती की तकनीकों से परिचित कर उन्हें गांव-स्तर पर प्रसार के लिए सक्षम बनाने पर केंद्रित रहा।

समापन सत्र में केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रेनू सिंह, वैज्ञानिक डॉ. ओ.पी. सिंह और डॉ. देवेश पाठक ने प्राकृतिक खेती के मुख्य घटकों—जैसे जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, मल्चिंग, जैविक कीट नियंत्रण व मृदा स्वास्थ्य सुधार—पर विस्तृत जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने बताया कि प्राकृतिक खेती कम लागत में अधिक लाभ देने वाली टिकाऊ तकनीक है, जो रासायनिक कृषि पर निर्भरता घटाती है। प्रशिक्षणार्थियों को जैविक घोल बनाने की विधि और उनके उपयोग व्यवहारिक रूप से सिखाए गए।
कार्यक्रम में कृषि विभाग से देवमणि त्रिपाठी ने विभाग की योजनाओं, प्राकृतिक खेती प्रोत्साहन कार्यक्रम और किसानों को उपलब्ध कराई जा रही तकनीकी सहायता के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि कृषि सखियाँ और CRP ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों तक सही तकनीक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
समापन अवसर पर वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रेनू सिंह द्वारा कृषि सखियों और CRP को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। प्रमाण पत्र पाने वालों में अनुपम श्रीवास्तव, मधु कुमारी, जानकी, अनीशा बेगम सहित कई कृषि सखियाँ शामिल रहीं। सभी ने बताया कि प्रशिक्षण से उन्हें प्राकृतिक खेती की गहन जानकारी प्राप्त हुई है जिसे वे अपने क्षेत्रों में किसानों तक पहुँचाएंगी।
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