संस्कृति मंत्रालय और शैल हस्तकला समिति की साझी सोच — शहर बना साहित्यिक संवाद का केंद्र
धारा लक्ष्य समाचार पत्र

बाराबंकी। भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी पर जनपद में एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, नई दिल्ली तथा शैल हस्तकला विकास समिति, सरावगी के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस आयोजन में सेमिनार एवं कवि सम्मेलन के माध्यम से अटल जी के व्यक्तित्व, राजनीतिक दर्शन और साहित्यिक योगदान को स्मरण किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता सिद्धार्थ अवस्थी रहे।
दो चरणों में संपन्न हुए समारोह के प्रथम भाग में विशेषज्ञों द्वारा अटल जी के जीवन दृष्टिकोण और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर चर्चा की गई, वहीं दूसरे चरण में कवियों ने उनकी विचारधारा से प्रेरित रचनाएँ प्रस्तुत कीं।कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध साहित्यकार श्याम सुंदर दीक्षित, जबकि कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर राम प्रकाश बेखुद ने की। मंच संचालन ख्यातिप्राप्त अवधी साहित्यकार किरण भारद्वाज ने बेहद प्रभावशाली अंदाज में किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने और सभी अतिथियों के सम्मान का जिम्मा शैल हस्तकला विकास समिति की निदेशक ईरा शुक्ला और कोषाध्यक्ष चारुलता शुक्ला ने बखूबी निभाया। उन्होंने प्रतिभागियों को पुष्पमाला, अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया, जिससे आयोजन की गरिमा और बढ़ गई।कार्यक्रम में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के साहित्यकारों की सहभागिता ने इसकी भव्यता को और बढ़ा दिया।
इनमें श्याम सुंदर दीक्षित, कृष्णकांत चतुर्वेदी, मनोज मिश्रा सीत, प्रदीप सारंग, लता श्रीवास्तव, रत्नेश शुक्ला, मनीष बैसवार, मालती बच्चन, ओम शर्मा, लोकेश त्रिपाठी सहित अनेक विद्वानों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। वहीं गुलजार बानों, सहर जावेद फारुखी, प्रमिला श्रीवास्तव, कौशल किशोर त्रिपाठी, आकाश वैभव, नंदिनी श्वेता, सिद्धार्थ, शिशिर, नलिनी शुक्ला, फहीम सिद्दीकी समेत अन्य गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे।
अटल जी की स्मृतियों को संजोने और उनकी कविताओं व विचारों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने का यह कार्यक्रम एक अनुपम सांस्कृतिक संदेश के रूप में सफल रहा।

