Barabanki Uttar Pradesh: मिलावटी, खराब व एक्सपायरी डेट बेच रहे खाद्य व्यापारियों को संरक्षण देता नजर आ रहा सरकारी तंत्र

शिकायत पर जांच के नाम वसूली का खेल और सब कुछ ठण्डे बस्ते में

-आमजन शिकायत किसपर करें व किससे कोई पारदर्शिता व जानकारी जब है ही नहीं! 

धारा लक्ष्य समाचार पत्र

बाराबंकी। जनपद के निवासियों की सेहत से खिलवाड़ अब तमाम विकृत खाद्य सामग्रियों को बेच रहे दुकानदार से ज्यादा सरकारी तंत्र ही करता नजर आ रहा है। जिसकी गवाही देते एक मामले में हिन्दी दैनिक समाचार पत्र के पत्रकार के साथ जिला मुख्यालय पर हुई घटना ही नहीं हैदरगढ़ में एक दुकान पर पत्रकार द्वारा बनायी वीडियो को अगर सच माना जाए, तो ब्रेड से लेकर तमाम नामचीन खाद्य पदार्थों के पैकेट एक्सपायरी डेट के स्पष्ट नजर आ रहे हैं।

लेकिन यहां भी दुकानदार उल्टा जागो ग्राहक जागो के सरकारी प्रयास से जागरूक हुए ग्राहकों से दबंगई-गुण्डागर्दी पर उतारू नजर आया। यह भी धमकी दे बताता नजर आया कि सब कुछ उसने बतौर सुविधा शुल्क मैनेज कर रखा है उल्टा वो जागरूक हुए ग्राहक को ही फंसा देगा।

बताते चलें कि यह कोई अतिश्योक्ति नहीं है तमाम वो प्रतिबंधित-जहरीली-नकली खाद्य सामग्री ना सिर्फ धड़ल्ले से जनपद में जिम्मेदारों के संरक्षण में बिक रही है। बल्कि छोटे बच्चों से लेकर स्वस्थ्य लोगों के स्वास्थ्य को खराब कर मौत के मुहाने पर पहुंचाती नजर आ रही है। तो जिम्मेदार सरकारी मोटी तनखाह तो लील ही रहे हैं

बावजूद इसके मोटे सुविधा शुल्क की मृगतृष्णा में इंसानियत व जिम्मेदारियों को ताक पर रख, दरकिनार कर आमजन के स्वास्थ्य व जिन्दगी के दुश्मन बने नजर आ रहे हैं। जिसका जीती जागता उदाहरण बीते माह 24 दिसंबर के आवास विकास कॉलोनी स्थित गुज्जू स्वीट्स पर तमाम पत्रकारों की मौजूदगी में रस मलाई खाकर बिगड़ गई। जबकि बाकी लोगों ने महक आने की शिकायत कर उसे वापस कर खराब मिठाई बेचने पर सवाल खड़े किए।

जिस पत्रकार को उल्टी आने लगी थी उसे मोहल्ला वासियों महिलाओं ने वहां अमूमन खराब मिठाई बिकने की बात कही भी।

लेकिन हद तब हो गई कि एक तो पत्रकार की तबीयत नकली जहरीली मिठाई खाने से ज्यादा बिगड़ने पर जब उसे जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया। तो तमाम पत्रकारों ने जिला खाद्य एवं औषधि विभाग के सहायक आयुक्त शैलेन्द्र प्रताप सिंह के सीयूजी नंबर पर जब कॉल कर शिकायत करना चाहा तो सीयूजी नंबर नहीं उठा।

जिसपर तमाम समाजसेवियों के बताए अनुसार भी बिगड़ी व पटरी से उतरी नौकरशाही में सीयूजी नंबर जहां सफेद हाथी साबित हो रहे हैं वही की गई शिकायत अब कार्रवाई से ज्यादा जिम्मेदारों के लिए धन उगाही का जरिया बन कर रह गई है।

फिलहाल खाद्य एवं औषधि विभाग की अनदेखी पर पीड़ित पत्रकार द्वारा आईजीआरएस सन्दर्भ संख्या-40017625080483 अंतर्गत संबंधित दुकानदार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। लेकिन यहां भी भ्रष्टाचार किसकदर सर चढ़कर बोल रहा है इसका तकाजा तब हुआ जब विभाग के शिकायत की जांच कर रहे शख्स ने पीड़ित से ना सिर्फ उल्टे धमकाने वाले लहजे में बात की बल्कि जब अन्य मीडिया कर्मियों ने फोन किया

तो बात बनाते हुए पहले तो यह बताया कि साहब कहीं मशगूल थे परिवारी दिक्कतें में, तो वहीं मामले के भी फर्जी तरीके से निस्तारित कर दिया गया। जैसा हैदरगढ़ वाले मामले सहित अन्य नामचीन दुकानों के मामले में भी सबके सामने ही है कि माल देते रहो और जहर खिलाते पिलाते रहो, रामराज्य जो है।

दरअसल यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी व मुख्यमंत्री योगी के रामराज्य के प्रयासों को नौकरशाहों ने उल्टा कर दिया है जिसमें परजीवियों, माफियाओं जहर बेच रहे सुविधा शुल्क दाताओं की तो चांदी है पर आमजन के लिए हर मोड़ पर संकट है। बचाव के लिए फोन किया तो मदद करने के लिए सीयूजी पर भी साहब नहीं चपरासी मिलने वाला है। शायद यही कलयुगी रामराज्य की परिभाषा हो?

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