धर्मपीठ का स्पष्टीकरण वाराणसी
यह अत्यंत खेद और आश्चर्य का विषय है कि जब पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरनन्द सरस्वती जी महाराज ने गोमाता को ‘राष्ट्रमाता’ का सम्मान दिलाने और गोहत्या-मुक्त भारत के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को 40 दिनों का समय दिया, उसी समय सत्ता-समर्थित तथाकथित धर्माचार्यों का एक कार्टेल सक्रिय हो गया है।
11 फरवरी 2026 को लगभग अपराह्न 4 बजे दैनिक भास्कर नामक एक समाचार माध्यम ने अपने डिजिटल संस्करण में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज से संबंधित एक भ्रामक, असत्य, तथ्यहीन एवं मानहानिकारक समाचार प्रकाशित किया, जिसका प्रकाशन विधि-विरुद्ध है।
स्पष्ट किया जाता है कि अभी तक उनके विरुद्ध पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत न कोई एफआईआर दर्ज है, न किसी माननीय न्यायालय में कोई कम्प्लैन्ट केस पंजीकृत है, न प्रयागराज की किसी माननीय न्यायालय ने उन्हें सम्मन किया है ऐसी स्थिति में 10 फरवरी को उनके किसी अधिवक्ता द्वारा कोई उत्तर दाखिल करने का प्रश्न ही नहीं उठता।
ज्ञात हो कि 28 जनवरी 2026 को आशुतोष ब्रह्मचारी व एक अन्य द्वारा प्रयागराज की एक माननीय न्यायालय में पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत एफ. आई. आर. दर्ज कराने हेतु आवेदन दिया गया, पर माननीय न्यायालय ने तत्काल आदेश देने से इंकार कर पुलिस से आख्या मांगी। झूठी सूचना के सोशल व अन्य मीडिया पर प्रसार के उपरांत 9 फरवरी 2026 को जगद्गुरु शंकराचार्य जी की ओर से आशुतोष ब्रह्मचारी एवं एक अन्य के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट की धारा 22, 23 तथा भारतीय न्याय संहिता की मानहानि एवं झूठे मुकदमे से संबंधित धाराओं में एक आवेदन दायर किया जिसे माननीय न्यायालय ने कम्प्लैन्ट केस सी एम सी संख्या 125/2026 के रूप में पंजीकृत कर उक्त दोनों अभियुक्तों को 20 फरवरी तक उपस्थित होकर उत्तर देने का समन जारी किया। यही सत्य है।
वास्तविक परिप्रेक्ष्य:
सरकारी तंत्र, रामभद्राचार्य जी, उनके सहयोगियों व कुछ शिष्यों का गठजोड़ धर्मपीठ ज्योतिष्पीठ की प्रतिष्ठा पर आघात कर रहा है; तर्कों में असफल होकर चरित्र हनन हेतु पॉक्सो एक्ट का सहारा लिया गया।
गो-रक्षा प्रतिष्ठा आंदोलन को बाधित करने का कुप्रयास: ४० दिनों के अल्टीमेटम से घबराई हुई सरकार और गोहत्या के समर्थक तत्व चाहते हैं कि पूज्य महाराज श्री को विधिक उलझनों में फँसाकर चुप करा दिया जाए और उनकी समाज में प्रतिष्ठा की हानि की जाये। यह सीधे तौर पर गोमाता के विरुद्ध किया जा रहा षड्यंत्र है।
ज्योतिष्पीठ इस प्रायोजित झूँठे प्रकरण का कड़ा विरोध करेगा; कथित पीड़ितों के पूर्व रिकॉर्ड व सत्ता-संबंधों की जाँच आवश्यक है तथा उनके अचानक सक्रिय होने पर प्रश्न उठते हैं।
हमने भारतीय न्यायसंहिता के अंतर्गत मानहानि तथा पाक्सो (POCSO) अधिनियम की धारा 22 व 23 के अन्तर्गत माननीय न्यायालय को झूठी सूचना देकर मुकद्दमेन में फँसाने तथा मीडिया के माध्यम से दुष्प्रचार करने हेतु कानूनी कार्यवाही आरम्भ कर दी है और तदनुसार के साक्ष्य उपलब्ध करा दिये हैं जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर नोटिस जारी कर 20 फरवरी को जवाब मांगा है। अडिग संकल्प: पूज्य महाराज श्री के संकल्पों से विचलित करने हेतु पूर्व में प्रयाग माघ मेले में प्रशासन द्वारा अवरोध उत्पन्न किया गया और अब यह झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया है। परंतु धर्मपीठ यह स्पष्ट करती है कि ऐसी गीदड़भभकियों से गोमाता को न्याय दिलाने का अभियान रुकेगा नहीं। हम सनातनी जनता, सत्य के पक्षधरों तथा सभी भक्तों का आह्वान करते हैं कि वे इस ‘अभिशप्त कार्टेल’ के षड्यंत्र को पहचानें। सत्य का सूर्य अधिक समय तक इन बादलों के पीछे नहीं छिप सकता। बस कुछ क्षण की प्रतीक्षा है, दूध का दूध और पानी का पानी शीघ्र ही सबके सम्मुख होगा। पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत किसी भी न्यायालय में चलने वाली कार्यवाही के विवरण को उसकी अनुज्ञा के बिना प्रचारित प्रसारित प्रकाशित करना उस अधिनियम के प्रविधानों के अंतर्गत दंडनीय अपराध है । अतः सभी इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट , सोशल मीडिया और उनके प्लेटफार्मों को चेतावनी दी जाती है कि ऐसे समाचार प्रकाशित न करें अन्यथा उनपर माननीय न्यायालय दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है । “

