गुजरात–केरल वैभव में सजेगा शिव–गौरा का गौना महोत्सव।
वाराणसी में रंगभरी एकादशी पर होने वाले शिव–गौरा गौना महोत्सव में इस वर्ष राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता की अनूठी झलक देखने को मिलेगी। पहली बार बाबा विश्वनाथ और माता गौरा की चल प्रतिमा को गुजरात, राजस्थान और केरल के पारंपरिक परिधानों में सजाया जाएगा।
बाबा विश्वनाथ अंगरखु, काठियावाड़ी कुर्ता और केरल के पारंपरिक मुंडू में राजसी रूप में नजर आएंगे, जबकि माता गौरा बंधानी/पटोला और कांजीवरम साड़ी में नववधू के रूप में अलंकृत होंगी। नथ, हार, झुमके, बाजूबंद और कमरबंद से उनका श्रृंगार किया जाएगा।
विशेष परिधान अहमदाबाद, जोधपुर और तिरुवनंतपुरम से मंगाए गए हैं, जिन्हें अंतिम रूप काशी के कारीगर दे रहे हैं। आयोजन समिति के अनुसार यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता का प्रतीक होगा। रंगभरी एकादशी पर शिव–गौरा का नगर भ्रमण काशी की परंपरा और राष्ट्रीय समन्वय का ऐतिहासिक दृश्य प्रस्तुत करेगा।

