पंचतत्व में विलीन हुआ ब्र.कु. सुरेंद्र दीदी का पार्थिव शरीर।
उ.प्र. से लेकर नेपाल से भी पहुँचें संस्था के हज़ारों सद्स्य।

नम आंखों से श्रद्दालुओं ने दी अंतिम विदाई।
संस्था के मुख्यालय से बी के डा. सविता, बी के देव आदि रहे शामिल।
सारनाथ । अपनी 13 वर्ष की बाल्यावस्था में ही परमात्म पथ पर चल, जन-जन की आध्यात्मिक सेवा में जीवन अर्पित करने वाली योगनिष्ठ राजयोगिनी ब्र.कु. सुरेंद्र दीदी का भौतिक शरीर पंचतत्व में विलीन हुआ । काशी में सात दशक लम्बा आध्यात्मिक और सामाजिक सेवा की अप्रतिम मिसाल पेश करने वाली दीदी की शारीरिक आयु 83 वर्ष की थी ।

उ.प्र. से लेकर नेपाल के अनेक स्थानों से दीदी की अंतिम यात्रा में शामिल होने पहुँचें सफेद वस्त्रधारी भाई-बहनों का हुजूम सारनाथ से हरिश्चंद्र घाट की ओर निकला तो लोग देखते रह गए । दीदी के पार्थिव शरीर की अंतिम यात्रा में शामिल लोग अश्रुपुरित निगाहों और अनचाहे मन से दीदी को विदाई दे रहे थे ।
संस्था के सारनाथ स्थित ग्लोबल लाईट हाउस के सभागार में श्रद्दालुओं के दर्शन हेतु रखे गए पार्थिव शरीर को संस्था के पूर्वी उ.प्र. और पश्चिम नेपाल की सह-निदेशिका राजयोगिनी परिनीता दीदी, क्षेत्रीय प्रबंधक ब्र.कु. दीपेंद्र, ब्र.कु. गीता दीदी, ब्र.कु. रंजना, सोमा, विमला, पुष्पा, विष्णु के साथ ब्र.कु. मोहन, पंकज, शैलेश, कानपुर से ब्र.कु. अशोक, भूपेंद्र आदि ने पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी विदाई दी ।
सारनाथ से प्रात:9:20 बजे निकली हुई शव यात्रा पहडिया, पाण्डेयपुर, चौकाघाट, मलदहिया, सिगरा, भेलूपुर होते हुए हरिश्चंद्र घाट पहुँची । घाट पर शहर दक्षिणी विधायक सौरभ श्रीवास्तव के साथ ए.टी.एस. के डीप्टी एस.पी. विपिन राय, एपेक्स हास्पिट्ल के निदेशक डा. एस.के. सिंह आदि ने तो सारनाथ में संस्था के कानपुर सबज़ोन प्रभारी ब्र.कु. गिरजा, प्रयागराज प्रभारी ब्र.कु. मनोरमा, लखनऊ प्रभारी ब्र.कु. राधा, ब्र.कु. सुमन, नेपाल से ब्र.कु. कमला, दुर्गा, सावित्री, गीता आदि ने दीदी को नम: आंखों से श्रद्धांजली दी । साथ ही संस्था के मुख्यालय आबूराज, राजस्थान से संस्था की मुख्य प्रशासिका मोहिनी दीदी और महासचिव बी के करूणा भाई की ओर से बी के डा. सविता, बी के देव, बी के कोमल, श्रीराम, अनिल, प्रदीप, विरेंद्र आदि ने दीदी को पुष्पांजलि अर्पित की ।
अपने जीवन काल में काशी के संत, महात्माओं और शंकराचार्यों के साथ विद्द्वत मण्डली के बीच आध्यात्मिक शक्ति पुंज नारी की मिसाल बन आगे बढने वाली दीदी ने सन् 1964 से काशी को अपनी कर्मस्थली बनाया । जन-जन के अंदर आध्यात्मिकता की अलख जगाए जीवन को सादगी, दिव्यता और पवित्रता से आलोकित करने वाली दीदी ने उ.प्र. से लेकर नेपाल तक में अपनी एक अलग पहचान बनाई ।
दीदी ने विद्यमान सरलता, दिव्यता, गम्भीरता जैसे गुण, अनुपम ओजपूर्ण ललाट और शक्तिशाली निगाहों से कोई भी प्रभाववित हुए बिना नहीं रह सकता था । दीदी जी के निधन पर स्थानीय संत-महात्माओ के साथ जन-प्रतिनिधी, बुद्धीजीवी आदि और गोरखपुर के सांसद रवि किशन ने भी शोक व्यक्त करते हुए इसे मानव समाज के लिए एक अपुरणीय क्षति बताया ।

