Lucknow UP : देवग्रीन डेवलपर्स घोटाला EXPOSED | बिना RERA लखनऊ में प्लॉट बिक्री? जमीन से ज्यादा प्लॉट बेचकर करोड़ों की ठगी का आरोप

धारा लक्ष्य समाचार पत्र

देवग्रीन डेवलपर्स का बड़ा खेल! लखनऊ में बिना RERA रजिस्ट्रेशन और बिना नक्शा मंजूरी के प्लॉट बिक्री का गंभीर आरोप।खसरा में जितनी जमीन नहीं, उससे हजारों वर्गफुट ज्यादा प्लॉट बेचकर निवेशकों को फंसाने का खुलासा

देवग्रीन डेवलपर्स पर ठगी के आरोप!

कृषि भूमि को रिहायशी प्लॉट बताकर ग्राहकों को किया गया गुमराह। नियमों की खुली अनदेखी कर कागजों में खेल, जमीन कम लेकिन बिक्री ज्यादा।

अंकुर वर्मा, चेतन श्रीवास्तव, प्रवीण कुमार पांडे और दिलीप कुमार सिंह पर सीधा आरोप

जमीन से ज्यादा प्लॉट बेचकर करोड़ों का खेल, ग्राहकों को फर्जी कब्जा और अधूरी रजिस्ट्री में फंसाने का बुना जाल।

सेमिनार, लग्जरी गाड़ियों और मार्केटिंग के पीछे छिपी जमीन घोटाले की कहानी निवेशकों के पैसों से खड़ा हुआ देवग्रीन के मालिकों का कथित साम्राज्य का पूरा नेटवर्क, अब सवालों के घेरे में।

लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र के ग्राम जमालपुर ददुरी में देवग्रीन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित की जा रही देव ग्रीन सिटी नाम की परियोजना अब एक भयावह और खतरनाक ठगी का सबसे बड़ा उदाहरण बन चुकी है जिसने सैकड़ों निर्दोष खरीदारों की जिंदगी को नर्क बना दिया है। कंपनी ने न तो रेरा की कोई स्वीकृति ली है न ही जिला पंचायत से नक्शा अनुमोदित कराया है बावजूद इसके प्लॉटों की बिक्री बेरोकटोक जारी है और लोग अपनी मेहनत की कमाई लगाकर सपनों का घर खरीदने का सपना देख रहे हैं।

लेकिन हकीकत में वे ठगी के जाल में फंसकर सब कुछ खोने वाले हैं। यह पूरा मामला इतना खतरनाक है कि अगर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो सैकड़ों परिवार बर्बाद हो जाएंगे और भविष्य में स्वामित्व विवादों की आग पूरे क्षेत्र को जलाकर रख देगी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कंपनी ने विभिन्न खसरा नंबरों में खरीदी गई भूमि से कहीं ज्यादा क्षेत्रफल बेच दिया है जो सीधे तौर पर धोखाधड़ी का प्रमाण है। खसरा संख्या 703 में सिर्फ बारह हजार दो सौ सत्तर वर्गफुट भूमि खरीदी गई लेकिन सोलह हजार आठ सौ पचास वर्गफुट बेच दी गई।

यानी चार हजार पांच सौ अस्सी वर्गफुट अतिरिक्त भूमि बेचकर कंपनी ने खरीदारों को ठगा है। खसरा संख्या 709च में 28442 वर्गफुट खरीदी गई जबकि 32250 वर्गफुट बेची गई यानी तीन हजार सात सौ अड़सठ वर्गफुट अतिरिक्त। खसरा संख्या 690 एवं 702 में पांच हजार एक सौ तिरेपन वर्गफुट खरीदी गई लेकिन छह हजार चार सौ वर्गफुट बेची गई यानी एक हजार दो सौ सैंतालीस वर्गफुट अतिरिक्त। सबसे भयावह आंकड़ा खसरा संख्या 717 का है।

जहां सिर्फ सत्रह हजार सात सौ छह वर्गफुट भूमि खरीदी गई लेकिन पैंतीस हजार तीन सौ वर्गफुट बेच दी गई यानी सत्रह हजार पांच सौ चौनानवे वर्गफुट अतिरिक्त भूमि बेचकर कंपनी ने लाखों रुपये की ठगी की है। इन आंकड़ों को देखकर कोई भी समझ सकता है कि कंपनी ने हजारों वर्गफुट भूमि वास्तविक उपलब्धता से ज्यादा बेचकर एक भयंकर फ्रॉड को अंजाम दिया है।

जिसके चलते वैधानिकता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और खरीदारों का पैसा डूबने वाला है।

इसके अलावा कंपनी पर यह आरोप भी है कि उसने कृषि भूमि को अपने नाम पर रजिस्ट्री कराकर ग्राहकों को आवासीय या विकसित प्लॉट के रूप में बेचा है जबकि धारा 80 के अंतर्गत भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। यानी खेत की जमीन को घर बनाने लायक बताकर बेचा जा रहा है जो कानूनी रूप से पूरी तरह गैरकानूनी है और भविष्य में इन प्लॉटों पर कोई भी निर्माण नहीं हो पाएगा। जिन भूखंडों पर ग्राहकों को कब्जा दिया जा रहा है ।

वे या तो कंपनी के नाम पर दर्ज नहीं हैं या पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं जिससे स्वामित्व विवाद उत्पन्न होने की पूरी आशंका है। कई ग्राहक आज भी तहसील कार्यालयों में खारिज-दाखिल यानी म्यूटेशन के लिए भटक रहे हैं लेकिन उनका काम लंबित पड़ा है और उन्हें रोजाना परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं।

यह स्थिति इतनी खतरनाक है कि एक सामान्य मध्यम वर्ग का परिवार अपनी पूरी जीवन भर की बचत लगाकर प्लॉट खरीद लेता है लेकिन बाद में पता चलता है कि न तो जमीन उसके नाम है न ही उस पर कब्जा टिक सकता है। ऐसे में परिवार की क्या हालत होगी इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।

कंपनी के मालिक अंकुर वर्मा चेतन श्रीवास्तव प्रवीण कुमार पांडे और दिलीप कुमार सिंह ने मिलकर इस पूरे ठगी के साम्राज्य को खड़ा किया है। इन चारों ने ठगी के पैसों से न सिर्फ खुद को अमीर बना लिया है बल्कि भव्य जीवन जीने लगे हैं। बड़ी बड़ी लग्जरी गाड़ियां खरीदीं भव्य सेमिनार आयोजित किए जहां लोगों को सपनों की दुनिया दिखाई गई लेकिन असलियत में सब कुछ फ्रॉड पर टिका है।

धारा लक्ष्य समाचार ने इन सभी आरोपों पर कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा था लेकिन कंपनी के डायरेक्टर चुप्पी साधे रहे और आरोपों पर एक शब्द भी नहीं बोला। यह चुप्पी खुद में एक बड़ा सबूत है कि कंपनी इन आरोपों को झुठलाने की हिम्मत नहीं कर पा रही है।

कंपनी कई साइट्स का दावा करती है कि वह उनको विकसित कर रही है लेकिन बाकी की साइट्स पर कंपनी ने सिर्फ मार्केटिंग कर रखी है। खुद को बहुत बड़ी कंपनी साबित करने के लिए वहां भी मार्केटिंग साइट्स पर फ्रॉड ही कर रही है। ऐसे में कंपनी के मालिक बड़ी बड़ी गाड़ियों में घूमते हैं बड़े बड़े सेमिनार करते हैं और ठगी के पैसों से पूरा साम्राज्य खड़ा कर दिया गया है।

यह देखकर आम आदमी का खून खौल उठता है कि कुछ लोग दूसरों की मेहनत की कमाई को लूटकर राजसी जीवन जी रहे हैं जबकि पीड़ित परिवार रातों रात बर्बाद हो रहे हैं। यह पूरा खेल इतना भयावह है कि अगर सरकार और प्रशासन ने तुरंत संज्ञान नहीं लिया तो यह ठगी का सिलसिला और बढ़ेगा और सैकड़ों अन्य कंपनियां भी इसी रास्ते पर चल पड़ेगी।

खरीदारों को सलाह दी जाती है कि वे तुरंत कानूनी रास्ता अपनाएं और अपनी शिकायतें दर्ज कराएं ताकि इन मालिकों पर कार्रवाई हो सके। लेकिन फिलहाल स्थिति यह है कि कंपनी प्लॉट बेचती जा रही है पैसा वसूलती जा रही है और खरीदारों को अंधेरे में रखा जा रहा है। ग्राम जमालपुर ददुरी का यह इलाका अब ठगी का हॉटस्पॉट बन चुका है जहां हर दिन नए नए ग्राहक फंस रहे हैं

और अपना सपना टूटता देख रहे हैं। कंपनी के मालिकों ने न सिर्फ भूमि की अतिरिक्त बिक्री की है बल्कि कृषि भूमि को आवासीय बताकर कानून की आंखों में धूल झोंकी है। धारा 80 का उल्लंघन करना कोई मामूली बात नहीं है यह सीधे तौर पर भूमि कानून का अपराध है जिसकी सजा भारी हो सकती है। फिर भी ये चारों मालिक बेखौफ घूम रहे हैं और अपने साम्राज्य को और मजबूत करने में लगे हैं।

यह खबर सिर्फ एक कंपनी की ठगी की नहीं है बल्कि पूरे रियल एस्टेट सेक्टर में फैले भ्रष्टाचार की कहानी है जो आम आदमी के विश्वास को तोड़ रही है। अगर ऐसे घोटाले जारी रहे तो लोग कहीं भी निवेश करने से डरने लगेंगे और अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। लखनऊ जैसे शहर में जहां विकास की रफ्तार तेज है वहां ऐसी कंपनियां सिर उठा रही हैं जो बिना अनुमति के प्रोजेक्ट चला रही हैं और लोगों को लूट रही हैं।।

देवग्रीन डेवलपर्स की यह परियोजना अब एक चेतावनी बन चुकी है कि सपनों की दुनिया बेचने वाले कई बार ठग होते हैं। खरीदारों को चाहिए कि वे कोई भी प्लॉट खरीदने से पहले रेरा रजिस्ट्रीशन चेक करें नक्शा अनुमोदन देखें और भूमि का पूरा रिकॉर्ड तहसील से वेरिफाई करें। लेकिन जो लोग पहले ही फंस चुके हैं उनके लिए अब कानूनी लड़ाई ही एकमात्र रास्ता बचा है।

कंपनी के मालिकों अंकुर वर्मा चेतन श्रीवास्तव प्रवीण कुमार पांडे और दिलीप कुमार सिंह पर अब सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है। इन चारों ने मिलकर न सिर्फ लाखों रुपये की ठगी की है बल्कि सैकड़ों परिवारों का भविष्य अंधकारमय कर दिया है। ठगी के पैसों से खरीदी गई लग्जरी गाड़ियां और आयोजित भव्य सेमिनार अब इनके खिलाफ सबूत बन सकते हैं।

धारा लक्ष्य समाचार जैसे माध्यमों ने सच्चाई उजागर की है लेकिन अब प्रशासन को भी जागना होगा। यदि इन मालिकों को बचाया गया तो यह संदेश जाएगा कि ठगी करना आसान है और सजा नहीं मिलती। यह भयावह मामला हर उस व्यक्ति को चेतावनी देता है जो रियल एस्टेट में निवेश करने जा रहा है। देव ग्रीन सिटी का नाम सुनकर लोग आकर्षित हुए लेकिन अब यह नाम ठगी का पर्याय बन गया है।

कंपनी की मार्केटिंग साइट्स पर दिखाए गए भव्य मॉडल और प्रोजेक्ट अब हवा में तैर रहे हैं क्योंकि असल जमीन पर कुछ भी नहीं है। कब्जा दिए गए प्लॉट या तो कंपनी के नाम पर नहीं हैं या फिर क्षेत्रफल कम है जिससे भविष्य में अदालती लड़ाइयां शुरू हो जाएंगी और पीड़ितों को सालों तक परेशान होना पड़ेगा। म्यूटेशन लंबित होने से तहसील स्तर पर रोजाना की दौड़ भाग खरीदारों की जिंदगी नर्क बना रही है।

कुछ ग्राहक तो अपनी पूरी पूंजी लगा चुके हैं और अब न घर मिला न पैसा वापस। यह स्थिति इतनी खतरनाक है कि कई परिवार मानसिक तनाव में हैं और कुछ तो आर्थिक संकट का शिकार हो चुके हैं। कंपनी के डायरेक्टरों की चुप्पी इस बात का प्रमाण है कि वे खुद को दोषी मानते हैं

लेकिन सजा से बचने के लिए चुप हैं। बड़े बड़े सेमिनार में लोगों को आकर्षित करके पैसा वसूलना और फिर पीछे हट जाना यह फ्रॉड का सबसे पुराना लेकिन सबसे खतरनाक तरीका है। अंकुर वर्मा चेतन श्रीवास्तव प्रवीण कुमार पांडे और दिलीप कुमार सिंह जैसे नाम अब लखनऊ में ठगी के पर्याय बन चुके हैं।

इनके द्वारा खड़ा किया गया साम्राज्य अब टूटने वाला है क्योंकि सच्चाई सामने आ चुकी है और लोग जाग चुके हैं। अब समय आ गया है कि प्रशासन इन आरोपों की जांच करे और अगर साबित हुए तो इन मालिकों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी कंपनी ऐसी हिम्मत न कर सके।

खरीदारों से अपील है कि वे एकजुट हों और अपनी शिकायतें दर्ज कराएं। यह मामला सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे समाज के लिए खतरा है जहां सपनों को बेचकर उन्हें चूर चूर किया जा रहा है। देवग्रीन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड की इस भयावह ठगी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बिना जांच के कोई भी प्रोजेक्ट न खरीदें और कानूनी कागजात जरूर देखें। अन्यथा आपकी जिंदगी भी इन खरीदारों जैसी नर्क बन सकती है।

यह खबर एक चेतावनी है एक खतरे की घंटी है और एक सच्चाई का आईना है जो हर निवेशक को सोचने पर मजबूर कर देगी हम फिर हाजिर होंगे एक नई खबर एक नई कंपनी के एक नए फ्रॅाड एक नए घोटाले का बेनकाब करने के लिए तब तक के लिए बने रहिए धारा लक्ष्य समाचार के साथ।

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