Varanasi UP…निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर लगे लगाम: आजाद अधिकार सेना का मांग पत्र।

निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर लगे लगाम: आजाद अधिकार सेना का मांग पत्र।

आजाद अधिकार सेना ने निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों के आर्थिक शोषण और शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण पर गहरी चिंता जताते हुए सरकार के नाम एक मांग पत्र जारी किया है। संगठन का कहना है कि वर्तमान में ‘शिक्षा का अधिकार’ केवल कागजों तक सीमित रह गया है, जबकि जमीनी स्तर पर निजी स्कूल इसे मुनाफाखोरी का साधन बना चुके हैं।
संगठन ने अपनी प्रमुख मांगों में फीस वृद्धि पर नियंत्रण को सबसे अहम बताया है। उनका कहना है कि हर वर्ष होने वाली बेतहाशा फीस वृद्धि पर तत्काल रोक लगाई जाए और एक पारदर्शी ‘कैपिंग सिस्टम’ लागू किया जाए, जिससे कोई भी स्कूल तय सीमा से अधिक शुल्क न वसूल सके।
इसके साथ ही ‘बिल्डिंग फंड’, ‘डेवलपमेंट चार्ज’ और ‘एनुअल फंक्शन’ जैसे नामों पर वसूले जाने वाले अनावश्यक शुल्कों को तुरंत समाप्त करने की मांग की गई है। संगठन ने यह भी कहा कि स्कूलों द्वारा निर्धारित दुकानों से ही किताबें और वर्दी खरीदने की बाध्यता खत्म की जाए और अभिभावकों को खुले बाजार से सामान खरीदने की स्वतंत्रता दी जाए।
आजाद अधिकार सेना ने सभी निजी स्कूलों के खातों का वार्षिक सरकारी ऑडिट कराने की भी मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फीस का उपयोग शिक्षा के स्तर को सुधारने में हो रहा है या निजी लाभ के लिए। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने और भारी जुर्माना लगाने की मांग भी उठाई गई है।
संगठन ने अपने संकल्प में कहा कि “शिक्षा व्यापार नहीं, संस्कार और अधिकार है। जब मध्यम और निम्न वर्ग का अभिभावक अपने बच्चे की फीस भरने के लिए कर्ज लेने को मजबूर हो जाता है, तो यह व्यवस्था की विफलता है।”
मांग पत्र में सरकार और प्रशासन से अपील की गई है कि वे मूकदर्शक बने रहने के बजाय इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाएं और ‘फीस रेगुलेटरी अथॉरिटी’ को जमीनी स्तर पर सक्रिय करें। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि निजी स्कूलों की मनमानी पर जल्द रोक नहीं लगाई गई, तो वह सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए बाध्य होगा।
इस दौरान संतोष कुमार मंडल (महासचिव), उधम सिंह (उपाध्यक्ष), श्याम सेठ (संगठन मंत्री), दीपक सेठ (विधानसभा अध्यक्ष), आरती गुप्ता (मीडिया प्रभारी) सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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