Varanasi UP…एक शाम साईं वसणशाह के नाम

एक शाम साईं वसणशाह के नाम

हिंद सिंध के मशहूर सूफी संत साईं वसणशाह साहब जिन्होंने अपने अध्यात्म गुरु साईं पारूशाह जी की सेवा में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था। उनकी एक प्राचीन दरबार पाकिस्तान के रोहड़ी प्रांत में सिंधु नदी के किनारे “आसाऊ तड़” के नाम से प्रसिद्ध है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है आशाओं को पूर्ण करने वाला तट (किनारा) और दूसरी दरबार हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बंटवारे के उपरांत मुंबई के मशहूर उपनगर कल्याण में स्थापित की गई थी।
दरबार के गद्दी नशीन पीठाधीश्वर साईं कालीराम साहब जी अपने परिवार और लगभग सौ सेवादारों के साथ विश्व की आध्यात्मिक नगरी काशी में दर्शन हेतु आए हुए हैं।
उनके आगमन के उपलक्ष्य में चौकाघाट स्थित संस्कृति विश्वविद्यालय के विशाल प्रांगण में समस्त उत्तर प्रदेश सेवा मंडल द्वारा मधुर प्रवचन और सूफ़ी संगीतमय संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें सर्वप्रथम ईष्ट देव साईं झूलेलाल साहब के पूज्य बहराणा साहिब जी की ज्योति प्रज्ज्वलित की गई तत्पश्चात सतगुरूओं की आरतियां उतारकर मेले की शुरूआत हुई जिसमें तमाम भक्तजनों ने संत साईं के प्रवचन और सूफ़ी संगीतमय संध्या का आनंद लिया। मेले में लगभग तीन से चार हजार भक्तों की उपस्थिति दर्ज की गई।
यह मेला प्रत्येक वर्ष उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में आयोजित किया जाता है।

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