●हैदरगढ़ क्षेत्र में निजी स्कूलों ने शिक्षा को बना लिया व्यापार, अभिभावकों का किया जा रहा शोषण
धारा लक्ष्य समाचार
हैदरगढ़ (बाराबंकी)। तहसील क्षेत्र में शिक्षा के नाम पर खुलेआम आर्थिक शोषण का मामला गहराता जा रहा है। निजी स्कूलों द्वारा किताबों और कॉपियों के नाम पर अभिभावकों से मनमानी वसूली किए जाने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे आम परिवार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। स्थिति यह है कि कक्षा 2 के एक छात्र का किताब-कॉपी सेट लगभग ₹5000 तक पहुंच रहा है, जबकि उसी स्तर की सामग्री का वास्तविक बाजार मूल्य 7 -8 सौ के आसपास माना जा रहा है।

नर्सरी और केजी कक्षाओं के लिए भी ₹3000 तक की वसूली की जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि यह सिर्फ महंगाई नहीं बल्कि एक सुनियोजित आर्थिक दबाव है, जिसे स्कूल प्रबंधन द्वारा व्यवस्थित रूप से लागू किया जा रहा है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि स्कूल हर वर्ष किताबों के प्रकाशन बदल देते हैं, जिससे पुराने छात्रों की किताबें नए छात्रों के काम न आ सकें। पहले एक ही परिवार के बच्चों में किताबें चल जाती थीं, लेकिन अब हर साल नई किताबें खरीदना मजबूरी बना दी गई है। यह व्यवस्था सीधे-सीधे अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने का माध्यम बन चुकी है।
क्षेत्र में कई स्कूलों द्वारा किताबों की बिक्री के लिए तय दुकानों का नेटवर्क तैयार किए जाने की भी बात सामने आई है। अभिभावकों को अप्रत्यक्ष रूप से उन्हीं दुकानों से खरीदारी के लिए बाध्य किया जाता है। कस्बा व तहसील क्षेत्र में कई ऐसे निजी स्कूल हैं, जहाँ पर किताबें एक ही निर्धारित दुकान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे अन्य दुकानदारों को यह सामग्री नहीं मिल पाती जिसको लेकर अभिभावकों में गहरा आक्रोश है।

अभिभावकों का आरोप है कि यहां न केवल किताबें अत्यधिक मूल्य पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, यही नहीं कापियां भी वही से दे रहे है जो कि बाजार मूल्य से अधिक दामों पर है बल्कि इनके वितरण में स्कूल से जुड़े लोगों की सीधी भूमिका है । स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि किताबों के व्यापार को निजी तौर पर संचालित कर कमीशन आधारित व्यवस्था चलाई जा रही है। इस प्रकार की व्यवस्था न केवल नियमों के विपरीत है, बल्कि शिक्षा के मूल उद्देश्य पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
उत्तर प्रदेश शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी विद्यालय द्वारा अभिभावकों को किसी एक विशेष दुकान से किताबें या अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। साथ ही किताबें मानक पाठ्यक्रम के अनुरूप हों और बाजार में सहज उपलब्ध हों। निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली करना और बिना पक्का बिल (GST) दिए बिक्री करना भी नियमों का उल्लंघन है। इसके बावजूद क्षेत्र में इन निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन देखने को मिल रहा है।
अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया है कि कॉपियों पर अंकित मूल्य से अधिक राशि वसूली जा रही है और कई स्थानों पर पक्का बिल भी नहीं दिया जाता, जिससे कर नियमों की अनदेखी की आशंका भी बढ़ जाती है। स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो शिक्षा पूरी तरह व्यापार में बदल जाएगी और आम परिवार के लिए बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाना और भी कठिन हो जाएगा।
अब देखना यह होगा कि शासन के निर्देशों की अनदेखी करने वाले इन संस्थानों पर प्रशासन कब और क्या कार्रवाई करता है। इस संबंध में जब खंड शिक्षा अधिकारी हैदरगढ़ आराधना अवस्थी से दूरभाष के जरिए बात करने का प्रयास किया गया तो उनके द्वारा फोन ही नहीं रिसीव किया गया। वही इस संबंध में उपजिलाधिकारी हैदरगढ़ राजेश कुमार विश्वकर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अगर ऐसा है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
