गौ कथा में गूंजा गौ संरक्षण का संदेश, संस्कृति से जुड़ने का आह्वान।

चौबेपुर, वाराणसी।
प्रबुद्धजन काशी न्यास के तत्वावधान में मुस्तफाबाद स्थित दुर्गा जी मंदिर प्रांगण में आयोजित भव्य गौ कथा कार्यक्रम में कथावाचक मोहम्मद फैज खान ने गौ माता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ माता को सभी देवी-देवताओं की जननी माना गया है और गौ हमारी आस्था, संस्कृति एवं जीवन का आधार है।
अपने उद्बोधन में उन्होंने गोत्र विषय पर विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि सनातन परंपरा में विवाह के लिए गोत्र का विशेष महत्व है। गोत्र केवल सामाजिक व्यवस्था ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “गोत्र” का अर्थ “गाय के त्राण” से है, जो संरक्षण एवं संवर्धन की भावना को दर्शाता है।
कथावाचक ने उदाहरण देते हुए बताया कि देश की प्रमुख नदियों—गंगा, गोमती, गोदावरी—तथा नगरों जैसे गोरखपुर, गोपालपुर और पर्वतों जैसे गोवर्धन के नामों में “गो” शब्द की उपस्थिति भारतीय संस्कृति में गौ के व्यापक महत्व को दर्शाती है।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने गौ संरक्षण एवं संवर्धन के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक कर्तव्य ही नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का दायित्व भी है।
इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का वातावरण भक्तिमय एवं प्रेरणादायक रहा।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से शशि भूषण सिंह, विश्वजीत सिंह, जितेंद्र सिंह जीतू, गुलाब, उदय प्रताप सिंह, पिंटू सिंह, देवी सिंह, बैंक सिंह, सीताराम सिंह, वंश नारायण सिंह, पप्पू सिंह, पेशकार खान, सतीश तिवारी, रितेश श्रीवास्तव, लोकपति सिंह, विनय कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय सिंह गौतम ने किया।

