धारा लक्ष्य समाचार लम्भुआ (सुल्तानपुर):स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लम्भुआ में मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) के स्पष्ट आदेशों के बावजूद हटाई गई दाई सोनकली के प्रसव कक्ष में लगातार ड्यूटी करने का मामला सामने आया है। इससे न केवल विभागीय आदेशों की धज्जियां उड़ती दिख रही हैं, बल्कि गर्भवती महिलाओं और नवजातों की सुरक्षा भी खतरे में नजर आ रही है।
बताया जा रहा है कि हाल ही में एक शिकायत के आधार पर सीएमओ सुल्तानपुर ने दाई सोनकली को प्रसव कक्ष से हटाने का निर्देश दिया था। शिकायत में आरोप था कि वह निर्धारित कार्य सीमा से बाहर जाकर डिलीवरी कराती हैं, जिससे पहले भी कई जच्चा-बच्चा की जान जा चुकी है। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए कार्रवाई की गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा।

स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का आरोप है कि सोनकली अब भी प्रसव कक्ष में सक्रिय हैं और मनमाने तरीके से काम कर रही हैं। इतना ही नहीं, उनके व्यवहार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। परिजनों का कहना है कि वह मरीजों से दुर्व्यवहार करती हैं और विरोध करने पर धमकी तक देती हैं।
सूत्रों के अनुसार, सीएचसी के मैटरनिटी सेंटर में दाई सोनकली का प्रभाव इतना अधिक है कि कोई भी कर्मचारी उनके खिलाफ बोलने से कतराता है। यही वजह है कि उच्च अधिकारियों के आदेश भी प्रभावी नहीं हो पा रहे हैं।

इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सवाल यह उठता है कि जब उच्च अधिकारी का आदेश ही लागू नहीं हो पा रहा, तो आम मरीजों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? क्या सीएमओ के आदेश सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे?
क्या सीएचसी लम्भुआ मनमानी और लापरवाही का केंद्र बन चुका है?
क्या किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही प्रशासन जागेगा?
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या कदम उठाता है और क्या वास्तव में दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
