Varanasi UP…हमारी बुजुर्ग माताएं, हमारी नींव”

हमारी बुजुर्ग माताएं, हमारी नींव”

वृद्धजन आवास में गर्मी से राहत देने हेतु MBS परिवार द्वारा कुलर भेंट

वाराणसी।

“नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गतिः।

नास्ति मातृसमं त्राणं, नास्ति मातृसमा प्रिया॥”

अर्थात — माता के समान कोई छाया नहीं, माता के समान कोई सहारा नहीं, माता के समान कोई रक्षक नहीं और माता के समान कोई प्रिय नहीं होता।

 

मातृ दिवस के अवसर पर सारनाथ स्थित वृद्धजन आवास वृद्धाश्रम में महिला भूमिहार समाज (MBS) के सदस्यों ने वृद्ध माताओं के साथ यह विशेष दिन प्रेम, सम्मान और अपनत्व के साथ मनाया। सभी ने माताओं के साथ समय बिताया, उनके सुख-दुख को जाना और उनके चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास किया। सच ही कहा गया है —

“ईश्वर का स्वरूप है मां, मेरे जीवन का रंगरूप है मां।”

महिला भूमिहार समाज की संस्थापिका डॉ. राजलक्ष्मी राय ने कहा कि वृद्ध माताओं के साथ कुछ पल बिताना हम सभी का सौभाग्य है। मातृ ऋण से मनुष्य कभी मुक्त नहीं हो सकता। मां केवल जन्म ही नहीं देती, बल्कि वह निस्वार्थ प्रेम की प्रतिमूर्ति होती है। जीवन के इस पड़ाव पर जब माताएं अपनों के साथ की कमी महसूस करती हैं, तब उनके बीच बैठकर उन्हें अपनापन देना ही सच्ची सेवा है। उनकी मुस्कान हमारे लिए सबसे बड़ा उपहार है।

कार्यक्रम के दौरान महिला भूमिहार समाज की सभी सदस्याओं ने माताओं को भोजन कराया, उनके साथ बैठकर भजन-कीर्तन किया तथा आत्मीय संवाद के माध्यम से उन्हें परिवार जैसा स्नेह देने का प्रयास किया। अपनों से दूर आश्रम में रह रही माताओं की आंखों में खुशी और भावुकता देखकर मशहूर शायर मुनव्वर राना की पंक्तियां याद आ गईं —

“इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है,

मां बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।”

इस अवसर पर महिला भूमिहार समाज की सदस्य किरण सिंह ने वृद्धजन आवास में गर्मी से राहत देने हेतु सप्रेम कुलर भेंट किया।

कार्यक्रम में डॉ. राजलक्ष्मी राय, पूनम सिंह, डॉ. मंजुला चौधरी,शकुंतला राय, वंदना सिंह, सोनी राय, विजयता राय, प्रतिमा सिंह, चंद्रकला राय, सरिता राय एवं बबीता राय,उमा,अनिता,सीमा,सौम्या,विनीता,प्रिया,सुषमा,उर्मिला,अंबू,स्वर्णा ,सरिता ,सुमन,मधु सहित अन्य सदस्याएं उपस्थित रहीं।

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