सीआईआई ‘लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से सम्मानित सुनील भारती मित्तल ने भारत में मज़बूत घरेलू निवेश और पूंजीगत व्यय बढ़ाने का आह्वान किया।
“माननीय मंत्री जी, यह सम्मान आपके हाथों प्राप्त करना मेरे लिए अत्यंत खुशी और गर्व का विषय है। आपने दूरसंचार मंत्री के रूप में मेरे पेशेवर सफर के कई महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण चरणों को करीब से देखा है।
मेरे अनेक मित्रों, सहयोगियों और सीआईआई परिवार के सदस्यों के साथ वर्षों तक काम करने का अवसर मिला है, और उन्हीं सामूहिक प्रयासों एवं सहयोग के कारण आज मुझे यह विशेष सम्मान प्राप्त हुआ है। मेरे लिए यह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी संबंधों, संस्थाओं और मूल्यों का सम्मान है, जिन्होंने भारत के उद्योग जगत को मजबूत बनाने में योगदान दिया है।
सीआईआई वास्तव में एक अत्यंत विशेष संस्था है – एक ऐसा मंच, जो उद्योग, सरकार, समाज और सभी हितधारकों को साथ लेकर ऐसी नीति-आधारित मूल्य श्रृंखला के निर्माण में कार्य करता है, जो देश की प्रगति को नई दिशा देती है।
मुझे गर्व है कि हमारे परिवार के तीनों भाइयों को विभिन्न उद्योग संगठनों के माध्यम से देश की सेवा करने का अवसर मिला। राकेश यहाँ उपस्थित हैं और वे भी सीआईआई के प्रेसिडेंट रह चुके हैं। वहीं, राजन ने फिक्की में नेतृत्व की भूमिका निभाई। मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि उद्योग जगत से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का यह दायित्व है कि वह उद्योग मंडलों और संस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाए — चाहे वह किसी विशेष सेक्टर, क्षेत्र, भूगोल या राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व की जिम्मेदारी हो।
मैं विशेष रूप से युवा उद्यमियों और उभरते उद्यमियों को प्रोत्साहित करना चाहूँगा कि वे सीआईआई जैसी संस्थाओं में जिम्मेदारियाँ निभाएँ, क्योंकि सरकार उद्योग संगठनों, विशेषकर सीआईआई जैसे संस्थानों, को नीति निर्माण और आर्थिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखती है।
मैं इस अवसर पर हमारे प्रधानमंत्री द्वारा कल दिए गए संदेश का भी उल्लेख करना चाहूँगा। आज वैश्विक परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण हैं। भारत एक मजबूत आर्थिक गति के साथ आगे बढ़ रहा है और लगातार 6-7 प्रतिशत की विकास दर बनाए हुए है। समग्र रूप से देखें तो देश की दिशा सकारात्मक है, लेकिन कुछ वैश्विक परिस्थितियाँ ऐसी होती हैं जो किसी एक देश के नियंत्रण से बाहर होती हैं। वर्तमान में पश्चिम एशिया की परिस्थितियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है और भारत भी इससे अछूता नहीं रह सकता।
ऐसे समय में उद्योग जगत की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। हमें अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। हम करोड़ों लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं और समाज तक सकारात्मक संदेश पहुँचाने की क्षमता रखते हैं।
हमें सोने के आयात पर अत्यधिक निर्भरता की मानसिकता से बाहर निकलना होगा। हमें अपनी ऊर्जा लागत को कम करना होगा और उद्योगों में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को और तेज़ गति से बढ़ाना होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें भारत की विकास यात्रा में और अधिक विश्वास के साथ निवेश करना होगा।
यह पीछे हटने का समय नहीं है, बल्कि भारत में और अधिक निवेश करने का समय है। हमारी अपनी कंपनी, एयरटेल ने वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 31,000 करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश किया। यदि टॉवर व्यवसाय से जुड़ी सहायक कंपनी को भी शामिल करें, तो यह निवेश लगभग 38,000 करोड़ रुपये तक पहुँचता है। आने वाले समय में यह निवेश और बढ़ेगा।
भारत दुनिया की सबसे युवा और आकांक्षी उपभोक्ता अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। यहाँ अवसर अपार हैं। हमें ‘मेक इन इंडिया’ के विज़न को और गति देते हुए भारत में निर्माण, भारत के लिए निर्माण और भारत की सेवा के संकल्प को और मजबूत करना होगा।
