ऐसी की ठंडक में बैठे देश विरोधी नेता इस घटना पर चुप हैं?
धर्मनिरपेक्षता के नाम पर उन्होंने दंगाइयों को आजादी दे दी है?
लोग बोलें —- अगर किसी को बांग्लादेश इतना ही प्रिय है, तो वह वहीं क्यों नहीं चला जाता?
ये पागल दंगाई भारत में ही रह कर भारत का ही अन्न खाकर भारत के लोगों को क्यों मार रहे हैं?
जो दंगाई बांग्लादेश के समर्थक हैं, जिन्हें बांग्लादेश अच्छा लगे, वे वहां चले जाएं। यहां दंगा और लुटमार ना करें।
असहाय ग़रीब लोग अपने घरों से पलायन करने को मजबूर हैं, भय का माहौल लगातार गहराता जा रहा है?
हिंसा, आगजनी, लूट और हत्या की घटनाएं आम हो चुकी हैं, टीएमसी के नेता खुलेआम धमकियों पर धमकियां दे रहे हैं?
विपक्षी दलों—और टीएमसी के गठबंधन की चुप्पी इस हिंसा में उनकी अप्रत्यक्ष सहमति का संकेत मानी जा रही है?
जहां एक ओर निर्दोष लोगों के घर जलाए जा रहे हैं, दुकानों को लूटा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल सियासी लाभ के लिए दंगाइयों को संरक्षण दे रहे हैं?
सवाल उठ रहे हैं कि आखिर धार्मिक उन्माद फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की जगह, ममता सरकार उन्हें शांति का प्रतीक क्यों बता रही है?
“धर्मनिरपेक्षता की आड़ में अराजकता फैलाने वालों को बंगाल में दंगाइयों की खुली छूट से देशभर में गुस्सा
नई दिल्ली, संजय साग़र सिंह। देशभर में इस अराजकता को लेकर आम ग़रीब जनता में भारी चिंता और आक्रोश है। लोग मांग कर रहे हैं कि ममता सरकार को इस स्थिति पर तुरंत नियंत्रण करना चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। धर्मनिरपेक्षता के नाम पर हिंसा और नफरत को बढ़ावा देने वालों पर कानून के तहत कठोर कार्यवाही होनी चाहिए।
लोगों ने बताया कि वर्तमान स्थिति में गरीब और कमजोर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है। ऐसी की ठंडक में बैठे देश विरोधी नेताओं ने धर्मनिरपेक्षता के नाम पर उन्होंने दंगाइयों को आजादी दे दी है। असहाय ग़रीब लोग अपने घरों से पलायन करने को मजबूर हैं, भय का माहौल लगातार गहराता जा रहा है। हिंसा, आगजनी, लूट और हत्या की घटनाएं आम हो चुकी हैं।टीएमसी के नेता खुलेआम धमकियों पर धमकियां दे रहे हैं। वक्फ बोर्ड और धर्म के नाम पर जमीन कब्जाने व धन उगाही के आरोप भी सामने आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में पिछले एक सप्ताह से जारी हिंसा ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना ने देशभर के लोगों में गुस्सा उत्प◊न्न कर दिया हैं, वहीं दंगाइयों की हिमायती पार्टियों ने हमेशा की तरह इस वार भी चुप्पी साध ली हैं। और जहां एक ओर निर्दोष ग़रीब असहाय लोगों के दंगाइयों द्वारा घर जलाए जा रहे हैं, दुकानों को लूटा जा रहा है, ग़रीब लोगों की हत्या की जा रही हैं, दान का पैसा और गरीबों की जमीनों पर कब्ज़ा करने वाले चंद देश विरोधी नेता वक्फ के नाम पर ग़रीब लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं और उन्हें गुमराह कर रहे हैं, एवं दंगाई पूरी खुली मनमानी से दंगा कर रहें हैं। असहाय गरीबों के घर-दुकान में आग लगा रहे हैं। और साथ ही, देश विरोधी नेता ऐसे ऐसे व्यान दे रहे हैं जिससे दंगाइयों को पूरी पूरी छूट एवं हिम्मत और मंजूरी मिल रही हैं और ग़रीब लोग दंगाइयों की दहशत के मारे पलायन कर रहे हैं।वहीं दूसरी ओर वक्फ की आड़ में देश विरोधी और संविधान विरोधी राजनीतिक दल सियासी लाभ के लिए दंगाइयों को संरक्षण दे रहे हैं।
लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके सहयोगी न केवल इस हिंसा पर चुप्पी साधे हुए हैं, बल्कि दंगाइयों को ‘शांति दूत’ कहकर उनकी खुलेआम हिमायत कर रहे हैं।
लोग सवाल उठ रहे हैं कि आखिर दंगाइयों को इस तरह खुली छूट क्यों दी जा रही है? धार्मिक उन्माद फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की जगह, ममता सरकार उन्हें शांति का प्रतीक बता रही है। धर्मनिरपेक्षता की आड़ में राज्य में अराजकता फैलाने वालों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। विपक्षी दलों—की पार्टी और टीएमसी के गठबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इन सभी की चुप्पी इस हिंसा में उनकी अप्रत्यक्ष सहमति का संकेत मानी जा रही है।
लोगों ने बताया कि बड़ी हैरानी की बात यह है कि कुछ नेताओं द्वारा बांग्लादेश समर्थक मानसिकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। ग़रीब जनता का सवाल है कि अगर किसी को बांग्लादेश इतना ही प्रिय है, तो वह वहीं क्यों नहीं चला जाता? ये पागल दंगाई भारत में ही रह कर भारत का ही अन्न खाकर भारत के लोगों को क्यों मार रहे हैं? उन्होंने कहा कि जो दंगाई बांग्लादेश के समर्थक हैं, जिन्हें बांग्लादेश अच्छा लगे, वे वहां चले जाएं। यहां दंगा और लुटमार ना करें।

