Lakhimpur: जान से खेल रहे झोलाछाप डॉक्टर,झोलाछापों की मंडी बना निघासन क्षेत्र

श्रवण कुमार सिंह

निघासन (खीरी)।झोलाछापों डाक्टरों के खिलाफ सरकार चाहे जितना भी सख्त आदेश दे दे,लेकिन इसका स्वास्थ्य विभाग पर कोई असर पड़ता दिखाई नहीं देता हैं। निघासन तहसील क्षेत्र व कस्बे में स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से सैकड़ों झोलाछाप डॉक्टर अपने-अपने क्लीनिक खोल कर बैठे हैं,तथा बिना लाइसेंस के मेडिकल स्टोर भी खोल रखे हैं।परंतु स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की इन पर कभी नजर नही पड़ती क्योंकि हर महीने पर झोलाछाप डॉक्टर स्वाथ्य विभाग को मोटी रकम का नज़राना जो देते हैं।

झोलाछापों डाक्टरों हर मर्ज के ईलाज से जानलेवा काम करते हुए देखा जा सकता हैं।दर्जनों मरीजो की मौतें भी हो चुकी हैं।जब कोई मरीज झोलाछापों डाक्टरों की दवा से मरता हैं,तो चंद दिन तक स्वास्थ्य विभाग इन डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चलाकर खानापूर्ति करता हैं।

लेकिन इससे पहले विभाग के कर्मचारी झोलाछापों डाक्टरों को फोन कर छापेमारी की खबर दे देते हैं।और वह अपनी दुकानें कुछ देर के लिए बन्द कर देते हैं।कुछ घंटे बाद फिर अपनी अपनी दुकानें खोल कर बैठ जाते हैं।कुछ झोलाछापों डाक्टरों ने तो शहर के नामी डॉक्टरों का नाम भी अपनी दुकान सामने लिखवा रखा हैं।पर वह मौक़े पर तो दिखाई नहीं देते हैं,

वह केवल कागजों तक ही सीमित रह गये हैं।मरीज की हालत बिगड़ते ही शहर के बड़े अस्पताल में शिफ्ट कर दिया जाता हैं।शहर के नामी डॉक्टरों से झोलाछापो ने साठगांठ कर रखी हैं।एक मरीज पहुचते ही झोलाछाप डॉक्टर हजारों रुपए की कमीशन का मालिक बन जाता हैं।स्वास्थ्य विभाग ने कई बार छापेमारी की लेकिन नतीजा सिफर ही रहा।

पकड़े जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग जांच कर कार्यवाही करने की बात कहकर झोलाछापों से मोटी रकम लेकर मामले को रफादफा कर देता हैं।तहसील निघासन क्षेत्र में लगभग साढ़े तीन सौ झोलाछाप डॉक्टर अपने क्लीनिक चला रहे हैं।लेकिन स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में यह गिनती बहुत नीचे तक ही पहुचती हैं।स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से मरीजो को अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा हैं।

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निघासन कस्बें में झोलाछाप डाक्टरों की कोई कमी नहीं हैं,बाजार गली निघासन व पलिया रोड सहित सिंगाही, झण्डी,दुबहा,बेलरायां,सेमरा बाज़ार आदि दर्जनों गांवों में झोलाछाप डाक्टरों की दुकानें एव इनके बिना लाइसेंस वाले मेडिकल स्टोर खुले हुए हैं।पर विभाग के जिम्मेदार अधिकारी के कानों में जूँ तक नहीं रेंग रही हैं।जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ हैं।जबकि योगी सरकार में सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्था लाभदायक चल रही हैं।

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