सतीश कुमार बाराबंकी। संतकवि बाबा बैजनाथ महाविद्यालय में चारों ओर सिर्फ अव्यवस्थाएं फैली हुई है,इस भीषण गर्मी में छात्र-छात्राओं को पीने के लिए पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है।महाविद्यालय से लेकर परिसर तक गन्दगी की भरमार लगी हुई है।बिजली के तार खुले पड़े हैं।

और पान मसाला खुटखा का भी जमकर प्रयोग किया जा रहा है सभी जिम्मेदार अंजान बने हुए हैं । हरख के हैदरगढ़ मार्ग स्थित संतकवि बाबा बैजनाथ महाविद्यालय में वृहस्पतिवार को हिन्दी दैनिक धारा लक्ष्य समाचार कि टीम ने जायजा लिया तो पता चला।

कि यहां तो बिजली के बोर्ड खुले पड़े हुए हैं और तार लटक रहे हैं जो किसी के लिए भी जानलेवा साबित हो सकते हैं छात्र-छात्राओं को पानी पीने के लिए भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं है।नल खराब पड़े हुए हैं टंकियों में पानी नहीं आ रहा है महाविद्यालय के अंदर लगा वाटर कूलर और आरओ कई महीनों से खराब चल रहा है।

यह सभी अव्यवस्थाएं . लगातार कई वर्षों से बनी हुई है महाविद्यालय परिसर में लगा इंडिया मार्का हैण्ड पंप भी ख़राब चल रहा है इस भीषण गर्मी में छात्र-छात्राए पानी के लिए तरस रहे है महाविद्यालय परिसर के अंदरअवलोकन करने के बाद यह पता चला कि यहां परगुटखा पान मसाला भीकाफी तेजी से प्रयोग किया जा रहा है ।

कुछ छात्र-छात्राओ ने बातया कि थोड़ा बहुत पानी लेकर घर से आते है गर्मी के कारण बाद में पानी खत्म हो जाता है महाविद्यालय के आस पास कोई दुकान भी नहीं कि पानी खरीदा जा सके।
महाविद्यालय के अंदर और जगह जगह झडिया उगी हुई है।और कूड़े के ढ़ेर लगे हुए है।खेल को बढ़ावा देने के विद्यालय में खेल मैदान की सुरक्षित जमीन में पड़ी हुई है।लेकिन खेल मैदान भी झडियो में तब्दील हो गया है।कक्षाओं को आने जाने में और जीने के नीचे गन्दगी की भरमार लगी हुई है महाविद्यालय के दरवाजों को दीमक खा रहे हैं मक्खियां भन भना रही है।


जिससे महाविद्यालय में संक्रामक रोग भी फैलने की आशंका बनी हुई है।इतना ही नहीं प्रोफेसरो को लाखो रूपये का वेतन मिलने के बाद भी महाविद्यालय के वेतन भोगी कर्मचारी से अपनी महंगी कार धुलवाई जा रही है बृहपतिवार को भी यही नज़ारा देखने को मिला महाविद्यालय में तैनात प्रोफेसर डॉक्टर धर्मवीर की कार को दैनिक वेतन भोगी लाल मोहम्मद धोता हुआ मिला है।
महाविद्यालय में अव्यवस्थाएं फैली हुई है,लेकिन कोई जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।महाविद्यालय की लापरवाही के चलते खमियाज़ा छात्र-छात्राओ को उठाना पड़ रहा है।अब देखने वाली बात यह होगी किखबर प्रकाशित होने के बाद व्यवस्थाओं में कोई सुधार होता है या फिर यूं ही सरकारी वेतन भोगी लापरवाह बने रहेंगे
