लोगों के विश्वास के साथ खेल गया सहारा दफ्तरों में लटक रहा ताला
जिला रिपोर्टर रोहित मिश्रा रायबरेली
रायबरेली। अक्सर गांवो में एक कहावत जरूर सुनी होगी कि हराम का पैसा निकल जाता है पर इससे ज्यादा वाहियात कहावत कुछ नही है असल में निकल तो आज के दौर में ईमानदारी व मेहनत खून पसीने की कमाई जाती है, जहां एक ओर दूरदर्शी सोच व सहारा इंडिया पर अंधाधुंध विश्वास करके जनपद भर में तमाम लोग दिनो रात अपनी मेहनत व खून पसीने की कमाई को सहारा में इस उद्देश्य से लगाते चले गए कि बीतते समय के साथ सहारा उनका सहारा बनेगा।
, पर ऐसा कुछ ना हुआ वीवीआईपी जिले में भी सहारा इंडिया ने लोगो के विश्वास कुचलकर ऐसा खेल खेला कि एजेंटो तक को मुंह छुपाकर इधर उधर भागने की चर्चाएं लगातार चल रही हैं तो वही जिले के सहारा के शाखाओं में ऐसा ताला लगाकर विरान कर दिया गया है जिसकी चाभी मानो हमेशा के लिए खो गयी आयदिन बहुसंख्यक लोग सहारा के ऑफिसो के बाहर गिरे हुए शटर में लटके हुए तालो की मनहूसियत को देखकर मायूसी से वापस लौट जाते बहुसंख्यक लोगो के विश्वास के साथ हुआ धोखे के साथ अब उनकी मेहनत की कमाई का मूलधन भी मिलने की उम्मीदें टूट चुकी है।
किसी ने बेटी की शादी के लिए जमा पूंजी इकट्ठा की, किसी ने अपने बुढ़ापे के लिए, किसी ने अपने बच्चों के लिए तो कोई अपने बेटियों के उच्चतम शिक्षा के लिए पर सहारा इंडिया पर लगा ऐसा न हटने वाला ग्रहण लोगों की उम्मीदो की धज्जियां तो उड़ा दी पर अब उन तमाम लोगो को सत्ता की सरकार मात्र से आखिरी उम्मीदे रह गयी हैं।

