मिठाई पर लगाई जाने वाली चाँदी का असली सच
भारत में जब भी कोई खास मिठाई बाज़ार से खरीदी जाती है तो अक्सर उसके ऊपर चमकदार चाँदी का वर्क चढ़ा होता है। इसे लोग शान और आकर्षण का प्रतीक मानते हैं। लेकिन क्या सच में यह स्वास्थ्य के लिए ठीक है? आइए जानते हैं।
👉 कैसे बनता है?
चाँदी का वर्क बनाने के लिए सिल्वर के नॉन-बायोएक्टिव पीसेस को पीटकर बनाया जाता है। परंतु कई जगहों पर मिलावटी तरीकों से एल्युमिनियम या अन्य धातुओं का वर्क बनाया जाता है, जो सेहत के लिए बेहद हानिकारक है।
👉 फायदे
असली चाँदी का वर्क अगर शुद्ध रूप से इस्तेमाल हो तो यह शरीर को ठंडक देता है, पाचन को बेहतर करता है और मानसिक शांति में सहायक माना जाता है। आयुर्वेद में भी शुद्ध चाँदी के बारीक भस्म का उपयोग औषधियों में किया जाता है।
👉 नुकसान
समस्या तब शुरू होती है जब मिठाई पर असली चाँदी की जगह नकली वर्क (एल्युमिनियम या मिश्रित धातुएँ) चढ़ा दी जाती हैं। यह लिवर और किडनी पर दबाव डाल सकती हैं, पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती हैं और लंबे समय तक सेवन करने पर विषाक्त प्रभाव डाल सकती हैं। कई बार इन वर्क को तैयार करने में जानवरों की आंत का भी प्रयोग होता है, जो धार्मिक और स्वास्थ्य दोनों दृष्टि से अस्वीकार्य है।
👉 निष्कर्ष
अगर वर्क पूरी तरह शुद्ध चाँदी से बना है, तो सीमित मात्रा में इसका सेवन हानिकारक नहीं बल्कि लाभकारी हो सकता है। लेकिन मिलावट और नकली वर्क से स्वास्थ्य को खतरा है। इसलिए मिठाई खरीदते समय भरोसेमंद जगह से ही खरीदें और संभव हो तो बिना वर्क वाली मिठाई को प्राथमिकता दें।
✨ असली चाँदी वर्क स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, लेकिन नकली वर्क केवल दिखावे की चमक है, जो सेहत बिगाड़ सकती है।

