जिला रिपोर्टर रोहित मिश्रा रायबरेली
रायबरेली -जनपद का दिल्ली स्थित सारस्वत फाउंडेशन द्वारा हिंदी माह के अवसर पर जारी की गई 100 प्रमुख हिंदी साहित्यकारों की सूची – वर्ष 2025 एक साधारण संकलन नहीं है, बल्कि यह हिंदी साहित्य के उत्थान और विकास के प्रति संस्था की प्रतिबद्धता का एक प्रमाण है। यह सूची किसी पारंपरिक मानदंड पर आधारित नहीं, बल्कि एक व्यापक और तार्किक शोध का परिणाम है, जिसे देश-दुनिया के पाँच हज़ार से अधिक विश्वविद्यालयी छात्रों के बीच किए गए सर्वेक्षण से तैयार किया गया है।
इस शोध के पीछे मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि वर्तमान हिंदी साहित्य में युवा पीढ़ी की रुचि किस दिशा में जा रही है। छात्रों से उनके सबसे पसंदीदा लेखक, उनकी सबसे प्रिय रचनाएँ, और उन साहित्यकारों के नाम पूछे गए, जिन्होंने उनके विचारों और दृष्टिकोणों को गहराई से प्रभावित किया।
यह दृष्टिकोण इस बात को स्थापित करता है कि यह सूची केवल लोकप्रियता पर आधारित नहीं है, बल्कि हिंदी साहित्य के प्रति छात्रों की गहरी समझ और जुड़ाव को दर्शाती है। इस शोध से यह भी स्पष्ट होता है कि हिंदी साहित्य की समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने में युवा पीढ़ी कितनी सक्रिय और जागरूक है।
सारस्वत फाउंडेशन के निदेशक, डॉ. प्रणव कुमार के अनुसार, “यह सूची हमें एक आईना दिखाती है, जिसमें हम देख सकते हैं कि हिंदी साहित्य का भविष्य किन हाथों में है। यह युवा पीढ़ी के साहित्यिक चयन और उनके दृष्टिकोण को समझने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।” इस सूची में शामिल हर साहित्यकार का चयन वैज्ञानिक और तार्किक मानदंडों पर आधारित है,
जिसमें साहित्य की विभिन्न विधाओं और शैलियों को ध्यान में रखा गया है। यह शोध न केवल हिंदी साहित्यकारों का सम्मान करता है, बल्कि हिंदी साहित्य के भविष्य की एक झलक भी प्रदान करता है।
डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’: जिनके लिए ‘व्यंग्य’ सब कुछ है
इस सूची में 99वें स्थान पर शामिल डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उनका यह स्थान उनकी व्यंग्य रचनाओं के गहरे प्रभाव और उनकी लोकप्रियता का प्रमाण है। ‘उरतृप्त’ उपनाम से व्यंग्य जगत में प्रसिद्ध डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा अपनी भावनाओं और विचारों को अत्यंत ईमानदारी और गहराई से अभिव्यक्त करते हैं। उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण उनके लेखन के विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान से मिलता है।
वे न केवल एक प्रसिद्ध व्यंग्यकार हैं, बल्कि एक कवि और बाल साहित्य लेखक भी हैं। उनके व्यंग्य लेखन ने उन्हें एक विशेष पहचान दिलाई है। उनका व्यंग्य ‘शिक्षक की मौत’ साहित्य आजतक चैनल पर अत्यधिक वायरल हुआ, जिसे लगभग दस लाख से अधिक बार पढ़ा और देखा गया, जो हिंदी व्यंग्य के इतिहास में एक अभूतपूर्व कीर्तिमान है। उनका व्यंग्य-संग्रह ‘एक तिनका इक्यावन आँखें’ भी काफी प्रसिद्ध है, जिसमें उनकी कालजयी रचना ‘किताबों की अंतिम यात्रा’ शामिल है।
इसके अतिरिक्त ‘म्यान एक, तलवार अनेक’, ‘गपोड़ी अड्डा’, ‘सब रंग में मेरे रंग’ भी उनके प्रसिद्ध व्यंग्य संग्रह हैं। ‘इधर-उधर के बीच में’ तीसरी दुनिया को लेकर लिखा गया अपनी तरह का पहला और अनोखा व्यंग्य उपन्यास है।
साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को तेलंगाना हिंदी अकादमी, तेलंगाना सरकार द्वारा श्रेष्ठ नवयुवा रचनाकार सम्मान, 2021 (मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के हाथों) से सम्मानित किया गया है। राजस्थान बाल साहित्य अकादमी के द्वारा उनकी बाल साहित्य पुस्तक ‘नन्हों का सृजन आसमान’ के लिए उन्हें सम्मानित किया गया है।
इनके अलावा, उन्हें व्यंग्य यात्रा रवींद्रनाथ त्यागी सोपान सम्मान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों साहित्य सृजन सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। डॉ. उरतृप्त ने तेलंगाना सरकार के लिए प्राथमिक स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर कुल 55 पुस्तकों को लिखने, संपादन करने और समन्वय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बिहार, छत्तीसगढ़, तेलंगाना की विश्वविद्यालयी पाठ्य पुस्तकों में उनके योगदान को रेखांकित किया गया है।
कई पाठ्यक्रमों में उनकी व्यंग्य रचनाओं को स्थान दिया गया है। उनका यह सम्मान दर्शाता है कि युवा पाठक गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी लेखन की पहचान कर सकते हैं। यह सूची हिंदी साहित्य के बदलते परिदृश्य को दर्शाती है, जहाँ व्यंग्य जैसी विधाएँ भी आधुनिक समाज के बीच अपनी गहरी छाप छोड़ रही हैं।
डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ का योगदान हिंदी साहित्य के लिए अनमोल है, और उनकी रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेंगी।

