संस्कृत भारतीय संस्कृति की आत्मा है कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा।
संस्था के विकास एवं उन्नयन हेतु हरसंभव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन आचार्य पवन त्रिपाठी।
आचार्य पवन त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष, श्री सिद्धि विनायक मंदिर ट्रस्ट, मुम्बई एवं महामंत्री, भारतीय जनता पार्टी, मुम्बई ने आज सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा से औपचारिक शिष्टाचार भेंट की।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने आचार्य पवन त्रिपाठी का पारंपरिक रूप से अंगवस्त्रम प्रदान कर सम्मानपूर्वक स्वागत किया। यह भेंट सौहार्दपूर्ण एवं सकारात्मक वातावरण में सम्पन्न हुई।
मुलाकात के दौरान विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं प्रशासनिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श हुआ। संस्कृत शिक्षा के विस्तार, भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिक्षा के प्रचार-प्रसार पर विशेष चर्चा की गई।
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि संस्कृत भारतीय संस्कृति की आत्मा है तथा इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरन्तर प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग में डिजिटल माध्यमों एवं आधुनिक तकनीक के द्वारा संस्कृत शिक्षा को व्यापक स्तर तक पहुँचाया जा सकता है। विश्वविद्यालय इस दिशा में निरन्तर कार्य कर रहा है।
उन्होंने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान गतिविधियों के प्रोत्साहन तथा रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों के विकास पर विशेष बल दिया। साथ ही विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित बनाने हेतु किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी साझा की।
आचार्य पवन त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे शैक्षणिक, शोध एवं सांस्कृतिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान-परंपरा का एक प्रमुख केन्द्र है। उन्होंने विश्वविद्यालय के विकास एवं उन्नयन हेतु हरसंभव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।
उन्होंने विद्यार्थियों के नैतिक, बौद्धिक एवं चारित्रिक विकास पर बल देते हुए कहा कि संस्कारयुक्त शिक्षा ही सशक्त राष्ट्र निर्माण का आधार है।
यह शिष्टाचार भेंट भविष्य में विश्वविद्यालय एवं सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं के मध्य सहयोग एवं समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई।

