सिर्फ फोटो तक ही सीमित होकर रह गए, लाखों की लागत से बने यह भवन।
संग्रामपुर/अमेठी। जनपद के विकास खंड संग्रामपुर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत लाखों रुपये की लागत से बनाए गए, आरआरसी सेंटर अब उपेक्षा का शिकार हो गए हैं। जिन भवनों का उद्देश्य कचरे का संग्रह, छंटाई और रीसाइक्लिंग का था, वै आज खुद कचरे के ढेर व जंगल में तब्दील होकर सरकारी उदासीनता की पोल खोल रहे हैं।
चाहे वह कनू ग्राम सभा में बना हुआ आर आर सी सेंटर हो, चाहे वह गोरखापुर, बदलापुर, सहजीपुर और धोएं का हो सभी आरआरसी सेंटरों के हाल बदहाल हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत की ओर से इन केंद्रों की कोई देखरेख नहीं की जा रही है। सफाईकर्मी तो तैनात हैं, लेकिन मैदान में उनका कहीं अता पता नहीं है। भवनों तक जाने वाले रास्तों पर घास-फूस उग आई है और झाड़ू लगाने वाला कोई नहीं मिलता। लाखों रुपये खर्च करके बने ये केंद्र आज निष्क्रिय पड़े हैं। और ग्रामीण उनका उपयोग नहीं कर पा रहे। स्थानीय लोग कहते हैं कि स्वच्छ भारत मिशन को जन आंदोलन के रूप में लागू करने का सरकारी प्रयास गांवों में धराशायी साबित हो रहा है।
योजना का मकसद गांवों में कचरे का प्रबंधन और स्वच्छता को बढ़ावा देना था, लेकिन हकीकत यह है कि ये भवन केवल फोटो खिंचवाने के लिए चमकाए गए हैं। नतीजा गांवों में बढ़ती गंदगी और कूड़े के ढेर इस मिशन की असफलता को उजागर कर रहे हैं।

