Balrampur UP: सरकारी गाड़ी से अवैध खनन जीरो टॉलरेंस’की नीति पर गहराया सवाल

 दिवाकर कसौधन/ जिला संवाददाता बलरामपुर

बलरामपुर प्रशासन पर चुप्पी साधने का आरोप, रेंजर पर कार्रवाई में एक माह की देरी

बलरामपुर।उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ को बलरामपुर जिले में वन विभाग के एक गंभीर मामले ने सीधे तौर पर चुनौती दे दी है। जनकपुर रेंज के रेंजर अमरजीत प्रसाद पर सरकारी वाहन का उपयोग कर सेंचुरी नाला में अवैध खनन कराने का सनसनीखेज आरोप लगा है। यह मामला सिर्फ विभागीय अनियमितता तक सीमित नहीं बल्कि प्रशासन की ढीली कार्यशैली और संदिग्ध चुप्पी का जीता-जागता प्रमाण बन चुका है

मामले को लगभग एक माह बीत जाने के बावजूद, जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न होना स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच गहरे संदेह पैदा कर रहा है

वायरल वीडियो और ऑडियो ने खोली पोल

वीडियो के अनुसार, अवैध खनन का यह पूरा प्रकरण सरकारी गाड़ी उत्तर प्रदेश सरकार लिखे वाहन से हुआ, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। इससे भी अधिक चौंकाने वाला तथ्य यह है कि रेंजर अमरजीत प्रसाद की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी वायरल होने के साथ हीं अधिकारियों के पास पहुँच चुकी है। इस रिकॉर्डिंग में उन्हें कथित तौर पर एक पत्रकार पर वीडियो डिलीट करने का दबाव डालते सुना जा सकता है। यह ऑडियो रेंजर द्वारा अपने पद के खुले दुरुपयोग और मामले को दबाने के प्रयास को स्पष्ट करता है

प्रशासन की चुप्पी पर उठे साठगांठ के सवाल

टीम योगी महासभा के मंडल प्रभारी ने 29 सितंबर को ही कोतवाली जरवा में लिखित तहरीर देकर तत्काल जाँच और कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन एक माह की लंबी अवधि में न तो रेंजर को निलंबित किया गया है और न ही जांच में कोई ठोस प्रगति दिखाई दी है। स्थानीय जनता अब यह सवाल उठा रही है कि जब सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल ही अवैध गतिविधियों के लिए होगा, तो शासन की सख्त नीतियाँ कहाँ जाएंगी प्रशासनिक अधिकारियों, खासकर बड़े अफसरों की चुप्पी किसी संभावित साठगांठ की ओर साफ इशारा कर रही है, जिससे पूरे प्रशासनिक विभाग की विश्वसनीयता पर कलंक लगने का खतरा मंडरा रहा है

दागदार रहा है वन विभाग का इतिहास

यह पहला मौका नहीं है जब बलरामपुर का वन विभाग विवादों में घिरा है। जनकपुर रेंजर अमरजीत प्रसाद का नाम पिछले साल भी बाल मजदूरों को मजदूरी देते हुए एक वायरल वीडियो में सामने आया था। इसके अलावा, भाभर रेंज के पूर्व रेंजर डीप सिंह पर तत्कालीन जिलाधिकारी अरविंद सिंह के निर्देश पर भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत तुलसीपुर थाने में मुकदमा दर्ज हो चुका है

हाल ही में, खैर सिंडिकेट के मामले में बरहवा रेंज के तत्कालीन रेंजर राकेश पाठक पर सिंडिकेट चलाने के आरोप में मुकदमा, गिरफ्तारी और गैंगस्टर की कार्रवाई भी की गई है। वहीं, कुछ माह पूर्व बनकटवा रेंज में खैर की ट्रक लोडिंग के दौरान दो असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ़ फारेस्ट (ACF) की मौजूदगी में परमिट से अधिक लकड़ी लोड करने का मामला भी सामने आया था

जिलाधिकारी ने दिया आश्वासन, अब नतीजों का इंतजार

मामले की गंभीरता को देखते हुए, जिलाधिकारी बलरामपुर ने अब इस प्रकरण में जांच का आश्वासन दिया है। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के इस लंबे दौर के बाद, जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या सचमुच कोई कड़ी कार्रवाई होती है, या यह मामला भी पिछली फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। प्रशासन को अपनी विश्वसनीयता बचाने के लिए तत्काल और पारदर्शी कदम उठाने की जरूरत है

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