जिला संवाददाता दिवाकर कसौधन
बलरामपुर। बलरामपुर जिले के हरैया थाना क्षेत्र के ग्राम गुगौली कला में संयुक्त टीम द्वारा भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद होने ने सुरक्षा तंत्र और पुलिस की सतर्कता पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसएसबी, पुलिस और वन विभाग की टीम ने मुखबिर सूचना पर छापेमारी कर 68 नग गोला, 495 ग्राम सफेद पाउडर, 200 ग्राम पीला पाउडर, 166 ग्राम लाल पत्थर और 205 ग्राम काला पाउडर बरामद करते हुए आरोपी अजमेर को गिरफ्तार किया। लेकिन इससे बड़ा सवाल यह है कि इतनी भारी मात्रा में विस्फोटक महीनों तक उसके घर में जमा होते रहे और स्थानीय पुलिस को भनक तक नहीं लगी
विशेष बात यह है कि यही हरैया थाना क्षेत्र लगभग एक वर्ष पहले भी एक विस्फोट की घटना से दहला चुका है। उस समय भी क्षेत्र में अवैध रूप से विस्फोटक गतिविधियों की आशंका जताई गई थी, लेकिन घटना कुछ दिनों की चर्चाओं व कागज़ी जांच तक सीमित रही और उसके बाद न निगरानी बढ़ी, न ही कोई ठोस अभियान चलाया गया। परिणाम यह हुआ कि अपराधियों ने फिर से घरों में विस्फोटक जमा करना शुरू कर दिया और सुरक्षा एजेंसियाँ सोती रहीं।
ग्रामीणों ने खुलकर आरोप लगाया है कि संदिग्ध गतिविधियाँ लंबे समय से चल रही थीं, लेकिन पुलिस और खुफिया एजेंसियाँ जानते हुए भी मूकदर्शक बनी रहीं। यदि मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई न होती, तो सम्भव था कि यह विस्फोटक किसी बड़ी साजिश में इस्तेमाल होते और एक और अनहोनी घट जाती।
अभियुक्त के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 141/25 धारा 3/5 विस्फोटक अधिनियम में दर्ज कर लिया गया है, लेकिन इससे पहले की खुफिया विफलता व निगरानी की कमी को किसी भी तरह नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
*यही कारण है कि अब लोग यह सवाल पूछ रहे हैं
जब एक वर्ष पहले विस्फोट हो चुका था, फिर भी पुलिस ने सतर्कता क्यों नहीं बढ़ाई
क्या इलाके में अवैध विस्फटक कारोबार चल रहा है और उसे संरक्षण कौन दे रहा है क्या और भी ऐसे ठिकाने मौजूद हैं जिन तक पुलिस की नज़र अभी तक नहीं पहुँची है
सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, अब यह ज़रूरी है कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो और उन जिम्मेदार लोगों की भी जांच हो जिनकी लापरवाही ने क्षेत्र को लगातार खतरे में धकेल रखा है।
यह बरामदगी जितनी बड़ी सफलता मानी जा रही है, उतनी ही सिस्टम की असफलता को भी उजागर करती है।

