Balrampur Uttar Pradesh: 50 वर्षों से जारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई तो मिली जान से मारने की धमकी—आरोप ऑडियो-वीडियो आया सामने

लौकहवा गांव में जमींदार पर आतंक फैलाने का आरोप, पीड़ित ने न्याय की गुहार लगाई

शिकायतकर्ता परिवार आठ माह से गांव से बाहर रहने को मजबूर, सुरक्षा मांगी

पत्रकारों पर हमले के बाद भी कार्रवाई नहीं, प्रशासन पर उठ रहे सवाल

“मुख्यमंत्री के करीबी” बताकर दबंगई के आरोप, ग्रामीण ने जांच की मांग की

एक ओर जहाँ उत्तर प्रदेश के न्यायप्रिय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में माफिया एवं गुंडे कानून के शिकंजे में आने को मजबूर बताए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बलरामपुर जिले के एक गांव में खुलेआम आतंक का माहौल होने का आरोप लगाया जा रहा है। मामला, जिले के ललिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत स्थित लौकहवा गांव से जुड़ा है,

जो थाना क्षेत्र से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के कथित जमींदार जन्मेजय सिंह, उनके पुत्रों एवं सहयोगियों के कारण ग़रीब लोग वर्षों से भयभीत रहते आए हैं। बताया जाता है, उनके खिलाफ शिकायत करने वालों को जान से मारने की धमकी दी जाती है तथा कभी-कभी घर में घुसकर महिलाओं और बेटियों के साथ दुर्व्यवहार तक किया जाता है।

करीब आठ माह पूर्व इसी गांव के निवासी राम सुरेश ने कथित रूप से पिछले 50 वर्षों से जारी भ्रष्टाचार की शिकायत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जांच की मांग की थी। आरोप है कि शिकायत पत्र ब्लॉक एवं जिला स्तर पर पहुंचने के बाद किसी ने इसे लीक कर दिया।

इसके बाद जन्मेजय सिंह के पुत्र हर्षवर्धन सिंह, जो स्वयं को वकील बताते हैं, ने फोन पर राम सुरेश को न केवल अपशब्द कहे। बल्कि उठाकर ले जाने और जान से मार देने की धमकी भी दी।

राम सुरेश द्वारा थाना ललिया में शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई न होने का आरोप लगाया गया। बताया जाता है कि इसके बाद जन्मेजय सिंह के अन्य पुत्र मार्कण्डेय सिंह और सहयोगियों ने उनके घर पहुंचकर उनके बहन-बेटियों के सामने उन्हें उठा ले जाने और उन्हें गांव से उजाड़ देने की धमकी दी। राम सुरेश की पत्नी संगीता द्वारा पुनः पुलिस एवं जिला प्रशासन से शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई न होने की बात सामने आई। वर्तमान में राम सुरेश और उनका परिवार किसी अन्य प्रदेश में रहकर आजीविका चला रहे हैं तथा अपने गांव लौटने पर जान का खतरा बताते हैं।

राम सुरेश ने एक वीडियो जारी कर जिला प्रशासन एवं पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई है तथा मुख्यमंत्री से न्याय एवं गांव में कथित रूप से लंबे समय से चले आ रहे भ्रष्टाचार तथा प्रधानी संचालन की निष्पक्ष जांच की मांग की है। बताया जाता है कि गांव के मौजूदा ग्राम प्रधान “बूढ़े” नामक व्यक्ति हैं, जो कथित रूप से जन्मेजय सिंह के यहां नौकरी करते हैं। जबकि प्रधानी का वास्तविक कार्यभार उन्हीं के परिवार द्वारा संभाला जाता है।

बताया जाता है कि स्वयं को भाजपा प्रदेश इकाई परिषद का सदस्य बताने वाले जन्मेजय सिंह एवं उनके परिवार के खिलाफ शिकायत करने वालों को न केवल धमकी दी जाती है। बल्कि दबाव या हमले के माध्यम से शिकायत वापस लेने के लिए मजबूर किया जाता है। कुछ माह पूर्व सोहनलाल नामक व्यक्ति के सरकारी पट्टे की ज़मीन पर बने घर को जेसीबी से गिराए जाने एवं प्रताड़ना का आरोप भी लगाया गया था। इस मामले में भी स्थानीय थाना एवं जिला स्तर पर सुनवाई नहीं हुई।

हाल ही में लौकहवा गांव के मुहाने पर दो स्थानीय पत्रकारों पर हमला किए जाने, उन्हें घेरकर मारपीट करने एवं मोबाइल लूटने का आरोप भी सामने आया। पत्रकारों के अनुसार, इस मामले में भी बलरामपुर व ललिया पुलिस द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि आरोपी पक्ष की बात को प्राथमिकता दी जा रही है। और बलरामपुर पुलिस अनर्गल आरोप सोशल मीडिया के माध्यम से लगाया जा रहा है।

आरोप है कि जब भी जन्मेजय सिंह पर कार्रवाई का दबाव बनता है, वह स्वयं को मुख्यमंत्री का करीबी बताकर मामले से बच निकलने का प्रयास करते हैं तथा कथित रूप से कुछ स्थानीय नेताओं एवं विधायकों का संरक्षण भी प्राप्त रहता है। संभवतः, यही कारण है कि गंभीर शिकायतों के बावजूद प्रशासन स्तर पर कार्रवाई में लापरवाही बरती जा रही है।

ग्रामीण राम सुरेश ने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच एवं आरोपी पक्ष पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही अपने परिवार व ख़ुद के जानमाल की सुरक्षा की गुहार भी लगाई है।

Related posts