ASG आई हॉस्पिटल प्रकरण में बड़ा प्रशासनिक हस्तक्षेप।
आफरीन बानो का बयान विवेचना में शामिल करने का आदेश, पुलिस जांच की दिशा बदली।
वाराणसी। चर्चित एवं संवेदनशील ASG आई हॉस्पिटल प्रकरण में पुलिस विवेचना को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब एक महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ सामने आया है। वादिनी आफरीन बानो द्वारा विवेचना में लापरवाही का आरोप लगाते हुए दिए गए प्रार्थना पत्र पर पुलिस के उच्च अधिकारियों ने तत्काल संज्ञान लिया है। इसके तहत संबंधित विवेचक को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि वादिनी का विस्तृत बयान एवं संलग्न अभिलेख विवेचना का अनिवार्य हिस्सा बनाए जाएं।
सूत्रों के अनुसार, आफरीन बानो ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से यह गंभीर आपत्ति दर्ज कराई थी कि अब तक की विवेचना में उनके द्वारा प्रस्तुत महत्वपूर्ण तथ्यों, चिकित्सकीय पहलुओं एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे जांच की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे थे। प्रार्थना पत्र की गंभीरता को देखते हुए उच्च पुलिस अधिकारियों ने निर्देश दिया कि सभी तथ्यों, बयानों और दस्तावेजों को केस डायरी में विधिवत सम्मिलित किया जाए, ताकि विवेचना किसी भी प्रकार के संदेह से परे रह सके।
इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के दौरान वादिनी के साथ अधिवक्ताओं का एक प्रभावशाली प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहा। इसमें शशांक शेखर त्रिपाठी, आशुतोष शुक्ला, राजेश त्रिवेदी, आशुतोष सक्सेना, दीपक वर्मा, सुजीत कुमार सिंह, रामकृष्ण बघेल, पवन केसरी, सुजीत कुमार पटेल एवं भीष्म सिंह पटेल शामिल रहे।
अधिवक्ताओं ने एकमत स्वर में कहा कि यदि वादिनी के बयान और साक्ष्यों को समय रहते विवेचना में शामिल नहीं किया जाता, तो यह न्यायिक प्रक्रिया को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता था। उनका कहना था कि यह मामला केवल एक आपराधिक प्रकरण भर नहीं है, बल्कि पुलिस विवेचना की पारदर्शिता और जवाबदेही की भी कसौटी है।
पुलिस के इस आदेश के बाद कानूनी हलकों में चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। जानकारों का मानना है कि यह निर्देश न केवल विवेचना की दिशा बदल सकता है, बल्कि आगे चलकर पूरे मामले की कानूनी तस्वीर को भी गहराई से प्रभावित करेगा। पहले से ही जनचर्चा में बने इस प्रकरण में प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद निष्पक्ष जांच को लेकर नई उम्मीद जगी है, वहीं विवेचना पर अब कड़ी निगरानी तय मानी जा रही है।

