गरीबों की मदद और आत्मशुद्धि का पैगाम — मौलाना सैयद हैदर अब्बास
गोपालपुर (बिहार)। इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना रमज़ान रहमत, मग़फ़िरत और जहन्नम से निजात का महीना है। यह बातें गोपालपुर, बिहार के मौलाना सैयद हैदर अब्बास ने रमज़ान की फ़ज़ीलत बयान करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि रमज़ान आत्मशुद्धि, संयम और इबादत का विशेष अवसर है। रोज़ा इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक है, जो इंसान को सब्र, सहनशीलता और तक़वा की सीख देता है। यह केवल भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं, बल्कि दिल, दिमाग और ज़ुबान को भी गुनाहों से बचाने का अभ्यास है।
मौलाना ने बताया कि रमज़ान क़ुरआन का महीना है और इसी में शबे-क़द्र जैसी बरकत वाली रात आती है। इस माह में ज़कात, सदक़ा और फ़ित्रा अदा कर गरीबों व जरूरतमंदों की मदद की जाती है, जिससे समाज में भाईचारा और समानता बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि रमज़ान आत्म-सुधार और नैतिक उत्थान का महीना है, जो इंसान को सेवा, दया और परहेज़गारी का संदेश देता है।

