समायोजन प्रक्रिया पर उठाए सवाल, सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन।
जिला रिपोर्टर रोहित मिश्रा रायबरेली
धारा लक्ष्य समाचार पत्र
रायबरेली। बेसिक शिक्षा विभाग में चल रही शिक्षक समायोजन प्रक्रिया के विरोध में जिले के शिक्षकों ने सोमवार को जोरदार धरना प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और बाद में सिटी मजिस्ट्रेट को संबोधित ज्ञापन सौंपकर समायोजन प्रक्रिया में पारदर्शिता व न्यायपूर्ण कार्रवाई की मांग की।
धरने के दौरान शिक्षकों ने आरोप लगाया कि जिले में बेसिक शिक्षकों का समायोजन माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के विपरीत मनमाने तरीके से किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्ष 2018 में उच्च न्यायालय द्वारा कनिष्ठ शिक्षकों के समायोजन को निरस्त किया जा चुका है तथा वर्ष 2024 में भी इसी प्रकार के समायोजन पर रोक लगाई गई थी,
इसके बावजूद विभाग पुराने तरीके से ही कार्रवाई कर रहा है।शिक्षकों ने यह भी कहा कि समायोजन के दौरान विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि के आधार पर वरिष्ठता और कनिष्ठता तय की जा रही है, जिससे कनिष्ठ शिक्षक लगातार प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना था कि जुलाई 2025 में जिन शिक्षकों का समायोजन किया गया था, उन्हें मात्र दस माह बाद फिर से सरप्लस दिखाकर दूसरी जगह भेजने की तैयारी की जा रही है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग उठाई कि छात्र संख्या का निर्धारण वास्तविक नामांकन के आधार पर किया जाए, क्योंकि परिषदीय विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया 30 सितंबर तक चलती है और वर्तमान में कई विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ चुकी है। शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि समायोजन प्रक्रिया में प्रधानाध्यापक को भी सहायक अध्यापक की श्रेणी में गिना जा रहा है,
जो नियमों के विरुद्ध है।धरने में मौजूद शिक्षकों ने कहा कि न्यायालय ने केवल एकल विद्यालयों में न्यूनतम दो अध्यापक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, न कि व्यापक स्तर पर फेरबदल करने के। उनका कहना था कि बड़े पैमाने पर स्थानांतरण और समायोजन से जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं।
शिक्षकों ने मांग की कि समायोजन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी हो तथा यथासंभव शिक्षकों को उनकी न्याय पंचायत अथवा ब्लॉक क्षेत्र के भीतर ही समायोजित किया जाए। ज्ञापन सौंपने के बाद शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
