भक्ति का सच्चा स्वरूप समर्पण में है : बहन निर्मल मनचंदा।
वाराणसी, संत निरंकारी मिशन के मलदहिया स्थित सत्संग भवन में आयोजित जोन स्तरीय विशाल महिला समागम में दिल्ली से पधारी केंद्रीय प्रचारिका आदरणीया बहन निर्मल मनचंदा जी ने कहा कि आज अधिकांश लोग शर्तों पर भक्ति कर रहे हैं। एक अरदास पूरी होते ही दूसरी मांग रख दी जाती है और यदि कोई इच्छा पूरी न हो तो लोग भक्ति से भी दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक मन में कामनाएं रहती हैं, तब तक सच्ची भक्ति संभव नहीं है। भक्ति का वास्तविक अर्थ पूर्ण समर्पण है।
बहन निर्मल मनचंदा जी ने कहा कि जो कुछ भी जीवन में प्राप्त हो, उसे परमात्मा का आशीर्वाद मानकर संतोष और सुकून के साथ जीवन जीना ही सच्ची भक्ति है। उन्होंने कहा कि भक्ति से रिश्तों में प्रेम और मजबूती आती है तथा हर रिश्ता प्यारा लगने लगता है।
उन्होंने कहा कि प्रेम ऐसा होना चाहिए कि बच्चे कहें कि ऐसी मां दूसरी नहीं हो सकती, भाई कहे कि ऐसी बहन दूसरी नहीं हो सकती और पति कहे कि ऐसी पत्नी दूसरी नहीं हो सकती। संसार को एक सूत्र में बांधने की शक्ति केवल प्रेम में है और यह प्रेम भक्ति से ही प्राप्त होता है।
बहन जी ने कहा कि सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज सभी को ब्रह्मज्ञान से जोड़कर एक परमपिता परमात्मा की भक्ति का संदेश दे रही हैं। जब सभी एक परमात्मा की भक्ति करेंगे तभी समाज में एकता का भाव विकसित होगा, परिवार मजबूत होंगे और संसार में सुख-शांति स्थापित होगी।
समागम में बहनों ने गीत, विचार और कविताओं के माध्यम से संत निरंकारी मिशन की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया। कार्यक्रम के अंत में वाराणसी जोन के जोनल इंचार्ज श्री सिद्धार्थ शंकर सिंह ने उपस्थित श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
