काश! आज वे हमारे बीच होते, तो दलित समाज की तरक्की देखकर बेहद प्रसन्न होते।”—- वरिष्ठ समाजसेवी मुशरफ खान
काश!!आज पूज्य बाबा साहेब होते, तो अपने सपनों के भारत को साकार होता देखकर गर्व से अभिभूत होते।”—– वरिष्ठ समाजसेवी मुशरफ खान
धारा लक्ष्य समाचार
आगरा, संजय साग़र सिंह। भारत रत्न, संविधान निर्माता, शोषित-पीड़ितों के मसीहा और देश को दिशा देने वाले महामानव डॉ. बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की 134वीं जयंती पर वरिष्ठ समाजसेवी मुशरफ खान ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, “एक अकेले पूज्य डॉ. बाबा साहेब ने दलित समाज की तक़दीर बदल दी। काश! आज वे हमारे बीच होते, तो दलित समाज की तरक्की देखकर बेहद प्रसन्न होते।”
वरिष्ठ समाजसेवी मुशरफ खान ने कहा कि पूज्य बाबा साहेब का सम्पूर्ण जीवन सामाजिक न्याय, समानता और समरसता की अलख जगाने में समर्पित रहा। वे न केवल संविधान निर्माता थे, बल्कि एक ऐसे विचारक, चिंतक और युगद्रष्टा भी थे जिन्होंने दलित, वंचित, गरीब और कमजोर वर्गों को समाज की मुख्यधारा में लाने का कार्य किया।
“पूज्य बाबा साहेब की जयंती पर भारत के लोगों की सामूहिक शक्ति का यह प्रदर्शन, यह संकल्प—उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है। ”
उन्होंने बताया कि आज दलित समाज शिक्षा, सेवा, प्रशासन, न्यायपालिका, चिकित्सा, विज्ञान, पत्रकारिता और उद्योग जगत समेत हर क्षेत्र में अपने परिश्रम, ईमानदारी और लगन से देश और विदेश में नाम रोशन कर रहा है। “आज ऐसा कोई क्षेत्र नहीं बचा जहाँ दलित समाज का सशक्त प्रतिनिधित्व न हो। यह परिवर्तन पूज्य बाबा साहेब की सकारात्मक शिक्षा और उनके दिखाए राष्ट्रवादी रास्ते का ही परिणाम है।”
वरिष्ठ समाजसेवी मुशरफ खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद देते हुए कहा, “पूज्य बाबा साहेब की जयंती को राष्ट्रीय अवकाश घोषित कर प्रधानमंत्री मोदी जी और सीएम योगी जी ने उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी है। यह निर्णय ऐतिहासिक है और सामाजिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है।”
उन्होंने यह भी कहा कि पूज्य बाबा साहेब का मानना था कि देश तभी प्रगति करेगा जब सभी वर्गों को समान अधिकार मिलें और हर नागरिक शिक्षा से सशक्त हो। “पूज्य बाबा साहेब के विचारों को आत्मसात कर हमें देश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धा और कृतज्ञता होगी।”
समापन पर वरिष्ठ समाजसेवी मुशरफ खान ने कहा, “मैं पूज्य डॉ. बाबा साहेब को कोटि-कोटि नमन करता हूँ और संकल्प लेता हूँ कि उनके दिखाए राष्ट्रवादी मार्ग पर चलकर सामाजिक समरसता, समानता और देश की प्रगति के लिए सतत प्रयास करता रहूंगा। काश! आज पूज्य बाबा साहेब होते, तो अपने सपनों के नये भारत को साकार होता देखकर गर्व से अभिभूत होते।”

